BIG NEWS::चुनाव जीतने के लिए काले धन का इस्तेमाल.. निजी चैनल के स्टिंग में फंसे देश के कई दिग्गज सांसद

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Tv9 भारतवर्ष चैनल का बड़ा सनसनीखेज स्टिंग ऑपरेशन

खुलासा: चुनाव जीतने के लिए सांसद किस तरह से कालेधन का इस्तेमाल करते हैं

ये सांसद  स्टिंग ऑपरेशन में फंसे- साधू सिंह, बहादुर सिंह कोली, राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव, एमके राघवन,नागेंद्र प्रताप सिंह पटेल ,रामचंद्र पासवान , फग्गन सिंह कुलस्ते, नागेद्र पटेल, प्रवीण निषाद.

नई दिल्ली (khabargali) इस वक्त की सबसे बड़ी खबर Tv9 भारतवर्ष चैनल के सौजन्य से. टीवी 9 के ऑपरेशन भारतवर्ष पर देश के सफेदपोश नेताओं का पर्दाफाश जारी है। इस ऑपरेशन के जरिए आपके द्वारा चुने गए सांसदों की सच्चाई सामने लाई गई है. स्टिंग से पता चलता है कि सांसद चुनाव जीतने के लिए किस तरह से कालेधन का इस्तेमाल करते हैं. जनता की नुमाइंदगी करने वाले इन सांसदों ने खुद बताया है कि कैसे उन्होंने लोकतंत्र को नोटतंत्र में बदलकर रख दिया है.

टीवी 9 भारतवर्ष टीम की पकड़ में आए सांसद उदित राज, राजस्थान के भरतपुर लोकसभा सीट से सांसद बहादुर सिंह कोली. पहली बार 2014 के चुनाव में पंजाब के फ़रीदकोट से जीत हासिल कर संसद पहुंचे आम आदमी पार्टी नेता साधू सिंह ने  बिहार के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव खुफिया कैमरे के सामने कबूला कि वो पैसे के दम पर वोट का सौदा करते हैं. कैसे चुनावी रैली के लिए पार्टी की तरफ से लाखों रुपये खर्च किए जाते . चुनाव जीतने के लिए आम आदमी के वोट को खरीदना भी पड़ता है. सोशल मीडिया पर हर महीने 10-12 लाख़ रुपये खर्च होता है. LJP सांसद पैसे लेकर संसद में कोई भी सवाल पूछने को तैयार है.
कांग्रेस सांसद एमके राघवन ने बताया कि पिछले चुनाव में 20 करोड़ रुपये खर्च किए और चुनाव आयोग को सिर्फ 52 लाख का ब्यौरा दिया.
उत्तर प्रदेश के फूलपुर लोकसभा सीट से सांसद नागेंद्र प्रताप सिंह पटेल ने खुफिया कैमरे पर बताया कि वोट खरीदने के लिए कैश यानि ब्लैकमनी के अलावा शराब भी बांटने से वो पीछे नहीं हटते. कालेधन की डिलीवरी के लिए उनका पूरा सिस्टम तैयार है. पैसा मिलना पक्का हो तो दिल्ली से हवाई जहाज़ के रास्ते में लाखों-करोड़ों रुपये उनके घर तक पहुंच सकते हैं
बिहार के समस्तीपुर के सांसद रामचंद्र पासवान ने कबूला कि उन्होंने पिछले लोकसभा चुनाव में 5 करोड़ रुपए खर्च किये थे. साथ ही उनका ये भी दावा है कि बिहार में 6 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए पार्टी उम्मीदवारों पर पूरे 50 करोड़ रुपये खर्च हुए थे.  सुबह से चल रहे यह सनसनीखेज स्टिंग ऑपरेशन का चैनल में प्रसारण इस वक्त तक जारी है.

स्टिंग की खास बातें

  1. चेक में प्रॉब्लम, कैश दे दो..ये बोलते कैमरे की कैद में सांसद.
  2. वोट काटने के लिए डमी कैंडिडेट भी उतारना होता है. बूथ मैनेजमेंट में सबसे अधिक खर्च सांसदों ने स्वीकारा.
  3. सत्ताधारी दल ने एक सांसद ने बताया कि कैसे चुनावी रैली के लिए पार्टी की तरफ से लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं
  4. चुनाव में इस्तेमाल होने वाला कालाधन हवाला के ज़रिए उन तक पहुंचता है. ज़रूरत पड़ी तो लाखों की ये ब्लैकमनी को लाने और ले जाने के लिए एंबुलेंस का इस्तेमाल करते हैं. ये काम पुलिस की गाड़ी के जरिए भी किया जाता है.
  5. पप्पू यादव ने बताया कि ‘एक से सवा करोड़ रुपये खर्च हो जाता है. हालांकि रैलियों का खर्च अलग होता है सिर्फ हैलीकॉप्टर पर 1 करोड़ के लिए खर्च होता है. 2019 में लगभग 8 करोड़ रुपये खर्च कर जीतने का इरादा है.’
  6. अरविंद केजरीवाल की पार्टी के सांसद साधू सिंह ने खुलकर कहा, ‘पिछली बार जब चुनाव में उतरे थे तो आम आदमी पार्टी एक आंदोलन थी. अब एक राजनीति पार्टी है और पार्टी चलाने के लिए पैसा लेना गुनाह नहीं है.’
  7. TV9 भारतवर्ष की स्पेशल इंवेस्टिगेटिंग टीम के साथी उमेश पाटिल, कुलदीप शुक्ला, राम कुमार, अभिषेक कुमार और बृजेश तिवारी इस सांसद की हकीकत देश के सामने लाने के लिए दिल्ली से पंजाब के फरीदकोट गए.
  8.  वहीं इस स्टिंग के चंगुल में फंसे नेताओं की बौखलाहट भी सामने आ रही है. वे चैनल को देख लेने की धमकियां दे रहे हैं.

Comments

khabargali     Wed, 04/03/2019 - 23:35
बिलासपुर के भाजपा सासंद लखनलाल भी फंसे स्टिंग आपरेशन में खुद स्वीकार-चुनाव में खर्च किए थे 15 करोड़ नई दिल्ली/रायपुर। देश की तक़दीर बनाने वाली संसद में जो नेता भारत के भाग्य विधाता बनकर बैठते हैं, आज उन्हीं में से एक लखनलाल साहू पर बड़ा खुलासा हुआ है. 2014 मे साहू बीजेपी की तरफ से पहली बार सांसद बने थे. टीवी 9 भारतवर्ष के खुफिया कैमरे पर उन्होंने अपनी चुनावी जीत की पूरी इनसाइड स्टोरी खोली. नई दिल्ली के अपने घर पर साहू ने ऐसी ऐसी बातें कहीं कि टीवी9 भारतवर्ष की अंडरकवर टीम हैरत में ही पड़ गई. टीम ने उन्हें बताया कि वो एक ऐसी कंपनी से हैं, जो नेताओं को चुनावी ख़र्च के लिए करोड़ों रुपये दिलाती है. बस फिर क्या था, ज़्यादा से ज़्यादा फंड जुटाने के चक्कर में साहू ने बताया कि पिछले चुनाव में उन्होंने 15 करोड़ रुपए खर्च किए थे लेकिन दूसरी बार चुनाव में ज़्यादा खर्चा करना पड़ता है.