ग्रह और स्वास्थ्य की सभी समस्याओं का बेहतर समाधान ..औरा (Aura) डेव्हलपमेन्ट (7 चक्रों पर आधारित पूर्णत: वैज्ञानिक और प्रामाणिक पद्धति)

Rajesh shrivastava

khabargali। ज्योतिष एक उत्कृष्ट शास्त्र होने के बावजूद सभी के लिये लाभकारी नहीं बन पाया, किसी की कुंडली सही नहीं किसी को जन्म समय याद नहीं तो कोई अपनी कुंडली लेकर पंडित और पुजारी के पास चला गया जो कि ज्योतिषाचार्य ही नहीं और अपने अधूरे ज्ञान से लोगों को भ्रमित करते हैं पूजा पाठ (कर्मकांड) ओर ज्योतिष शास्त्र अलग- अलग ज्ञान है, किसी बिन्दू पर इनका मिलना एक अलग बात है। उक्त सभी समस्याओं का समाधान कुंडली व अंक विज्ञान के सहयोग से औरा (Aura) डेव्हलप कर बहुत बेहतर तरीके से किया जा सकता है, और परफेक्ट भी। ऊर्जा निरीक्षण की इस पद्धति से धारण किये गये धातु व रत्न के प्रभाव-दुष्प्रभाव को तुरंत तो देखा ही जा सकता है बल्कि यह भी सुनिश्चित किया जा सकता है की किस कलर शेड का रत्न, कितनी मात्रा में, किस धातु में व किस अंगुली में धारण करना श्रेष्ठ होगा। रत्न व धातु ग्रह के साथ-साथ किस चक्र को प्रभावित कर रहा है और उससे हमे क्या लाभ मिल सकता है इसकी भी पक्की जानकारी हासिल की जा सकती है।

हम सभी जानते है की हमारे मानव शरीर में 7 चक्रों का कितना प्रभाव है, और यह हमारे लिये कितना महत्वपूर्ण है और उसकी स्थिति पर ही हमारी स्थित निर्भर करती है। हम जानते है कि 7 चक्रों व उसके प्रभाव एवं औरा के बारे में यू ट्यूब व विभिन्न शास्त्र के बारे में विस्तार से जानकारी मिल जाती है। हम जान हम जान सकते हैं कि हमारे किस चक्र कि वजह से हमे क्या परेशानी हो सकती है और 'औरा' (Aura) डेव्हलपमेंट से क्या- क्या फायदे हैं। यहां यह बताना जरूरी है कि अब ऊर्जा परीक्षण की नयी तकनीक से सातों चक्रों को ठीक कर उनकी ऊर्जा को संतुलित कर 'औरा' (Aura) (सकारात्मक ऊर्जा का सुरक्षा कवच) को बहुत अधिक बढ़ाया जा सकता है और यह सभी कुछ संभव है उचित रत्न व धातु के माध्यम से । कुल मिलकर हम अपने ग्रह, स्वास्थ्य, शरीर व मन को चक्रों के माध्यम से काफी बेहतर बनाकर जीवन को आनंदमयी बना सकते हैं।

ग्रहों से चक्र प्रभावित है और चक्रों से ग्रहों को प्रभावित किया जा सकता है इसके लिये मंत्र, योगा और मेडिटेशन भी श्रेष्ठ उपाय बताये गये हैं जिन्हे आज की जीवन शैली में करना बहुत कठिन है, वहीं 1 से 3 सिटिंग में चक्रों को बैलेन्स करवाना ज्यादा आसान है। जिस तरह हम किसी एक बीमारी के लिये बल्ड टेस्ट, एक्स- रे, सोनोग्राफी, और दवा परिवर्तन की प्रक्रिया से गुजरते हैं उसी तरह हम औरा डेव्हलपमेंट की प्रक्रिया से गुजरकर उससे भी काम समय देकर बहुत अधिक लाभ उठा सकते हैं। 

संपर्क करें- राजेश श्रीवास्तव,11 ए, देवदीप कृपा , रवि नगर, रायपुर। मोबाइल- 700072227

Rajesh shrivastava