किसानों से किये वादे पूरे करने ही होंगे

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 उर्मिला देवी ‘उर्मि’


खबरगली । रायपुर। किसानों की संख्या भारतीय लोकतंत्र के जिस महानुष्ठान के लिये 55% से अधिक मतदाता तैयार करती है, उसके लिये चुनावी महासंग्राम 2019 अपने निर्णायक मोड़ पर पहुँचने वाला है। ग्रामीण सीटों पर किसानों की नाराज़गी का ख़ामियाज़ा, राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों में सत्तारूढ़ दल को जिस रूप में भुगतना पड़ा, उसके बाद तो सभी राजनीतिक दलों को संभल जाना चाहिए,और समझ लेना चाहिए कि बड़े ख़तरे की घंटी बज चुकी है। अब समय आ गया है कि सरकारें किसानों से किये गये वादों पर ईमानदारीपूर्वक विचार करने और उन्हें तय समय में, सही ढंग से पूरा करने की आदत डालें, अन्यथा और बड़ा खामियाज़ा भुगतने की नौबत आने ही वाली है।
    देश के अन्नदाता किसान अपनी विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से भी यह स्पष्ट कर चुके है कि उनके और सरकार के मध्य बड़ा मामला अब उचित ‘‘समर्थन मूल्य’’ और ‘‘समर्थन वोट’’ का बन चुका है। यदि सरकार ‘समर्थन मूल्य’ में बढ़ोत्तरी केवल कागजों पर ही करती है, हक़ीकत में नहीं, तो ‘समर्थन वोट’ की स्थिति भी वैसी ही होगी। राजनीतिक दल सत्ता में पहुँचकर अपने वादों को भूल जाते हैं उसी प्रकार किसान भी उनके समर्थन में वोट करना भुला दें, तो कैसी कष्टप्रद स्थितियाँ निर्मित होंगी, इसकी कल्पना स्वयं करके देखें। मीड़िया से प्राप्त जानकारी के अनुसार श्री राधामोहन सिंह ने 26 मई 2014 को कृषि मंत्री का पदभार संभालते समय कहा था कि किसानों का सशक्तिकरण उनकी प्राथमिकता है। इसके बाद भी अनेक कार्यक्रमों में किसानों के लिये लुभावने वादे-दावे किये जाते रहे हैं, किन्तु उनकी ज़मीनी हक़ीकत जग-जाहिर है और लाचार किसानों द्वारा आत्महत्या के मामलों में वृद्धि के समाचार मिलते जा रहे हैं।
    2019 के लोकसभा चुनावों से पूर्व भाजपा ने घोषणा की है कि किसानों को सालाना छः हजार रूपये दिये जायेंगे, तो कांग्रेस ने गरीब किसानों को 72000 रूपये सालाना दिये जाने की घोषणा कर लुभाने की कोशिश की। इस तरह के चुनावी वादे यदि समय रहते पूरे होते हैं, तो यह निश्चित रूप से भारतीय किसान और भारतीय राजनीति दोनों ही के लिये श्रेयस्कर होगा। वैसे अभी तक तो किसानों की आत्महत्या के मामले हों या उनकी फ़सलों के नुकसान की भरपाई के, अधिकतर सरकारें कागजों पर ही मुआवज़े बाँटकर अपने कत्तर्व्य की इति श्री मान लेती है, इस रवैये में बदलाव लाना ही होगा। समय की माँग है कि देश-दुनिया में खेती के क्षेत्र में होने वाले जो भी नवाचार भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल हों, उनके लिये किसानों को सभी प्रकार की जानकारी और सहायता जल्द मुहैया करानी होगी, देष के सूखाग्रस्त क्षेत्रों के किसानों को ‘‘ड्राय फ़ार्मिग’’ तकनीक अपनाकर खेती करने के लिये आर्थिक और तकनीकी सहायता उपलब्ध करवाने की पहल केन्द्र और राज्य सरकारों को ही करनी होंगी।
    अमेरिका के कैलिफोर्निया प्रान्त में भीषण सूखे के बीच करीब 2.75 लाख एकड़ ज़मीन पर बिना पानी सिंचाई के सब्जियों फलों की खेती की जा रही है, इससे किसानों को पहले की तुलना में 30% ज्यादा मुनाफा हो रहा है। यू ए ई के रेतीले इलाकों में प्रोटीन से भरपूर किनोआ की जो खेती की जा रही है, उसे बढ़ावा देने के लिये दुबई में आयोजित सम्मेलन में दुनिया के 100 से अधिक किसानों, शोधार्थियों, वैज्ञानिको, सरकारी प्रतिनिधियों ने भाग लिया। ऐसे नवाचारों और आयोजनो का लाभ भारतीय किसानों को देना होगा।  
    सत्ता-प्राप्ति के बाद राजनीतिक दल अपने वादों को भूल जाते है। उन्हें उनके वादे और अपनी माँगें - जैसे कृषि कर्ज माफी, नदियों को जोड़ना, किसानों के लिये पेंषन, छोटे- मंझोले-बड़े किसानों के बीच भेदभाव की समाप्ति, जीएम बीजों के आयात पर प्रतिबंध आदि याद दिलाने के उद्देश्य से ही राष्ट्रीय दक्षिण भारत रिवर लिंकिंग फार्मर एसोसियेशन ने वाराणसी में वर्तमान प्रधानमंत्री के विरूद्ध 111 किसानों को चुनावी उम्मीदवार बनाने की घोषणा की थी किन्तु एसोसियेशन के अध्यक्ष श्री अय्याकन्नु ने बताया कि भाजपा अध्यक्ष द्वारा इन माँगों को अपने चुनावी घोषणा पत्र में शामिल  करने का वादा करने पर किसानों की उम्मीदवारी का निर्णय वापस ले लिया गया। मीड़िया से प्राप्त जानकारी के अनुसार देश के लगभग 180 किसान संगठन देश में किसानों की दुर्दशा के हल के लिये समय-समय पर आन्दोलन के लिये विवश होते हैं, जो अत्यन्त लज्जाजनक है।      आन्दोलनों में जो समय, धन और ऊर्जा की बर्बादी होती है, उसे किसानों की दशा सुधारने में लगाना होगा।
    आने वाले लेखों में अन्य किसान संगठनों के बहुमूल्य सुझावों से रूबरू होने की आशा की जा सकती है। देश के एक प्रमुख किसान संगठन अखिल भारतीय किसान महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक डॉक्टर राजाराम त्रिपाठी ने मीड़िया को जानकारी दी कि किसानों को किसान सम्मान निधि का लाभ देना, किसानों के लिये पेंशन योजना, किसान क्रेडिट कार्ड पर मिलने वाला एक लाख रूपये तक का कर्ज़ पाँच वर्ष तक ब्याज रहित करना, भूमि रिकॉर्ड का डिजिटाइजेशन करना,आर्गेनिक खेती को प्रोत्साहन इत्यादि हमारे सुझावों को भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में शामिल किया है और साथ ही इन पर ईमानदारी पूर्वक काम करने का वादा भी किया है।     
देश में अब सरकार किसी भी दल की बने, आरम्भ से ही उसे किसान संगठनों द्वारा दिये गये सुझावों पर ईमानदारी पूर्वक काम करना ही होगा। यह समझना ही होगा कि देश की खुशहाली का रास्ता किसानों की खुशहाली के रास्ते से ही निकलता है। अतः किसानों से किये गये वादे पूरे करने ही होंगे, जिससे किसानों की बदहाली को खुशहाली में बदला जा सके।                                                                                                                                                                                                                              -  उर्मिला देवी ‘उर्मि,  अध्यक्ष राष्ट्रीय कवि, संपर्क- 9424212670