रायपुर-बिलासपुर हाईवे पर 100 किमी में सिर्फ 2 एम्बुलेंस! NHAI के खिलाफ वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने दायर की प्रथम अपील

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रायपुर (खबरगली)। राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल टैक्स की पूरी वसूली के बावजूद सड़क हादसों में घायलों को समय पर आपातकालीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से मिली जानकारी के आधार पर रायपुर-बिलासपुर नेशनल हाईवे पर एम्बुलेंस व्यवस्था और ट्रॉमा केयर सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने NHAI बिलासपुर की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी को अधूरा बताते हुए प्रथम अपील दर्ज कराई है।

अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर के अनुसार, रायपुर-बिलासपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-130) पर 100 किलोमीटर से अधिक लंबे हिस्से में केवल दो स्थानों पर एम्बुलेंस की व्यवस्था होने की जानकारी दी गई है। उन्होंने इसे सड़क दुर्घटना पीड़ितों को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिहाज से चिंताजनक बताते हुए NHAI की जवाबदेही पर सवाल खड़े किए हैं।

RTI में रायपुर-बिलासपुर हाईवे पर दो एम्बुलेंस पॉइंट की जानकारी

मनोज सिंह ठाकुर द्वारा प्राप्त RTI जवाब के अनुसार, NHAI बिलासपुर ने रायपुर-बिलासपुर हाईवे पर एम्बुलेंस की व्यवस्था के लिए दो स्थानों का उल्लेख किया है। H3: भोजपुरी और मुड़पार में एम्बुलेंस की व्यवस्था उपलब्ध कराई गई जानकारी में एम्बुलेंस के दो स्थान बताए गए हैं:

भोजपुरी: किलोमीटर 97.516

मुड़पार: किलोमीटर 110.300

अधिवक्ता ठाकुर का कहना है कि इतने लंबे और व्यस्त राष्ट्रीय राजमार्ग पर आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था की पर्याप्तता की समीक्षा आवश्यक है। उनके मुताबिक, दुर्घटना के बाद शुरुआती समय में एम्बुलेंस और चिकित्सा सहायता उपलब्ध होना घायल व्यक्ति की जान बचाने में निर्णायक साबित हो सकता है।

संबद्ध अस्पतालों और इमरजेंसी डॉक्टरों की जानकारी पर सवाल

RTI के माध्यम से अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने यह जानकारी भी मांगी थी कि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्तियों को किन संबद्ध अस्पतालों में ले जाया जाता है। इसके साथ ही उन्होंने 24 घंटे उपलब्ध इमरजेंसी डॉक्टरों, प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ और ट्रॉमा केयर सुविधाओं से संबंधित रिकॉर्ड मांगा था। उनके अनुसार, NHAI के जवाब में संबद्ध अस्पतालों और डॉक्टरों की तैनाती से जुड़ी अपेक्षित जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। अधिवक्ता ने इसे आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था की पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए संबंधित रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की है।

निजी कंपनी को सड़क हस्तांतरित करने पर NHAI की जवाबदेही पर सवाल

अधिवक्ता ठाकुर के मुताबिक, NHAI ने अपने जवाब में रायपुर-बिलासपुर मार्ग को ‘NHIT Southern Projects Pvt. Ltd.’ को मुद्रीकरण के तहत हस्तांतरित किए जाने का उल्लेख किया है। उनके अनुसार, प्राधिकरण ने इसी आधार पर कुछ अनुबंधों और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) से संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की बात कही। मनोज सिंह ठाकुर ने इस जवाब पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सड़क के संचालन या प्रबंधन में निजी कंपनी की भूमिका होने से नागरिकों की सुरक्षा और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं की निगरानी से संबंधित जवाबदेही का प्रश्न समाप्त नहीं हो जाता। उन्होंने मांग की है कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर एम्बुलेंस, अस्पतालों, डॉक्टरों और दुर्घटना के बाद त्वरित सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था को लेकर स्पष्ट जानकारी दी जाए।

1033 हेल्पलाइन और 10 मिनट में एम्बुलेंस पहुंचने के दावे पर सवाल

NHAI की 1033 हेल्पलाइन राष्ट्रीय राजमार्गों पर आपातकालीन सहायता के लिए महत्वपूर्ण माध्यम है। अधिवक्ता ठाकुर ने हेल्पलाइन पर कॉल करने के बाद एम्बुलेंस पहुंचने के निर्धारित समय और वास्तविक प्रतिक्रिया समय की जानकारी मांगी थी। उनका सवाल है कि यदि निर्धारित समय में सहायता पहुंचाने की व्यवस्था है, तो लंबे राजमार्ग खंडों पर एम्बुलेंस की पर्याप्त उपलब्धता और दुर्घटना स्थलों तक पहुंचने की प्रभावी व्यवस्था कैसे सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने विशेष रूप से एम्बुलेंस के रिस्पॉन्स टाइम, दुर्घटना स्थल से दूरी और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की वास्तविक उपलब्धता से जुड़े रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की है।

रायपुर-नागपुर और रायपुर-जगदलपुर हाईवे की जानकारी पर भी आपत्ति

मनोज सिंह ठाकुर ने अपनी RTI में रायपुर-नागपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-53), रायपुर-जगदलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-30), ओडिशा सीमा से जुड़े राजमार्गों और दिल्ली-NCR के कुछ हाईवे कॉरिडोर में आपातकालीन सुविधाओं की जानकारी भी मांगी थी। उनके अनुसार, कुछ मार्गों से संबंधित जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई और क्षेत्राधिकार का हवाला दिया गया। अधिवक्ता ने इस संबंध में सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 6(3) के अनुपालन पर सवाल उठाते हुए संबंधित सूचनाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।

NHAI के खिलाफ प्रथम अपील दर्ज, पंजीयन संख्या NHAIN/A/E/26/02643

NHAI बिलासपुर से मिले जवाब को अधूरा और असंतोषजनक बताते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने प्रथम अपीलीय प्राधिकारी, क्षेत्रीय अधिकारी NHAI रायपुर के समक्ष प्रथम अपील दर्ज कराई है। प्रथम अपील पंजीयन संख्या: NHAIN/A/E/26/02643 अपील में उन्होंने मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराने, राष्ट्रीय राजमार्गों पर आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं की स्थिति स्पष्ट करने और संबंधित विभागों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।

अनुच्छेद 21 और सड़क दुर्घटना पीड़ितों के अधिकार का मुद्दा

अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने अपनी अपील में सर्वोच्च न्यायालय के डॉ. एस. राजशेखरन बनाम भारत संघ मामले का उल्लेख करते हुए सड़क दुर्घटना पीड़ितों को त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के मुद्दे को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार से जोड़ा है। उनका कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है और सड़क के मुद्रीकरण या निजी कंपनी को हस्तांतरित किए जाने के बावजूद संबंधित प्राधिकरणों की जवाबदेही की समीक्षा होनी चाहिए।

हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करने की चेतावनी

मनोज सिंह ठाकुर ने कहा कि यदि छत्तीसगढ़ के राष्ट्रीय राजमार्गों पर पर्याप्त एम्बुलेंस, 24 घंटे चिकित्सा सहायता और संबद्ध अस्पतालों की पारदर्शी सूची उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो वे बिलासपुर हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर करेंगे। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्गों पर हर 50 किलोमीटर के अंतराल में सुसज्जित एम्बुलेंस, चौबीसों घंटे डॉक्टरों की उपलब्धता और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था की निगरानी सुनिश्चित करने की मांग की है।

“टोल की पूरी वसूली, तो जिंदगी बचाने की व्यवस्था क्यों नहीं?”

वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने कहा, “टोल प्लाजा पर एक सेकंड की छूट नहीं मिलती, FASTag से पूरा टैक्स काटा जाता है—फिर हाईवे पर नागरिकों की जान बचाने के नाम पर यह लापरवाही क्यों? निजीकरण का बहाना बनाकर NHAI जनता की जिंदगी से नहीं खेल सकता।” उन्होंने कहा कि प्रथम अपील दर्ज कराई जा चुकी है और आवश्यक कार्रवाई नहीं होने पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा।

खबरगली की टिप्पणी: राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल वसूली के साथ-साथ दुर्घटना के समय त्वरित सहायता, एम्बुलेंस की उपलब्धता, प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मियों और अस्पतालों तक पहुंच की व्यवस्था भी जनसुरक्षा का अहम हिस्सा है। इस मामले में NHAI की ओर से विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण और संबंधित राजमार्गों की आपातकालीन सुविधाओं का सत्यापित विवरण सामने आना जरूरी है।

अधिवक्ता मनोज ठाकुर द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज 

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