रायपुर में 101 फीट ऊंचे रावण का होगा दहन, 3.03 लाख रुपये की लागत से बने तीन पुतले

A 101-foot-tall effigy of Ravana will be set ablaze in Raipur; three effigies have been constructed at a cost of 3.03 lakh rupees raipur chhattisgarh hindi news khabargali

रायपुर (खबरगली)  रायपुर के विभिन्न मैदानों, कॉलोनियों और बस्तियों में रावण दहन की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। WRS कॉलोनी के दशहरा मैदान में इस बार 101 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन मुख्य आकर्षण रहेगा। वहीं, रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के छोटे-बड़े पुतलों की खरीदारी के लिए बाजारों में भी लोगों की चहल-पहल बनी हुई है।

बाजारों में सजे रावण के पुतले, 150 रुपये से 25 हजार तक कीमत

दशहरा पर्व को लेकर आमापारा, अग्रसेन चौक मार्ग और बांसटाल रूट पर कारीगरों ने रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले बिक्री के लिए सजाए हैं। इनकी कीमत करीब 150 रुपये से लेकर 25 हजार रुपये तक है। कारीगर रोहित सिन्हा और सुरेश ढीवर के अनुसार, इस बार बच्चों की पसंद को ध्यान में रखते हुए करीब दो फीट ऊंचे छोटे पुतले भी तैयार किए गए हैं।

कॉलोनियों और बस्तियों में दशहरा उत्सव आयोजित करने वाले युवा समूह 10 से 12 फीट ऊंचे पुतलों की खरीदारी में रुचि दिखा रहे हैं। ऐसे समूहों के लिए रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतलों की कीमत 20 से 25 हजार रुपये तक है। बच्चों में रावण दहन को लेकर विशेष उत्साह रहता है, जिसके चलते अभिभावक भी उन्हें साथ लेकर बाजार पहुंच रहे हैं।

WRS मैदान में 3.03 लाख रुपये की लागत से बने तीन पुतले

WRS कॉलोनी स्थित दशहरा मैदान में इस बार रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतलों के निर्माण पर कुल 3 लाख 3 हजार रुपये खर्च किए गए हैं। आयोजन समिति के प्रमुख एवं उत्तर क्षेत्र के विधायक पुरंदर मिश्रा के अनुसार, यहां 101 फीट ऊंचा रावण का पुतला तैयार किया गया है। अकेले इस पुतले के निर्माण पर डेढ़ लाख रुपये की लागत आई है।

रावण दहन के दौरान रंग-बिरंगी आतिशबाजी भी की जाएगी। भगवान श्रीराम के स्वरूप द्वारा अग्निबाण चलाकर रावण का दहन किया जाएगा। आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। अनुमान है कि WRS मैदान में रावण दहन देखने करीब पांच लाख लोग पहुंच सकते हैं।

बांस, पैरा और रंगीन कागज से तैयार होते हैं पुतले

रावण के पुतले बनाने के व्यवसाय से जुड़े मंगतु राम निषाद बताते हैं कि पहले बांसटाल में ही पुतले तैयार किए जाते थे और ग्राहकों की संख्या भी सीमित थी। अब मांग बढ़ने के साथ शहर के कई प्रमुख मार्गों पर पुतलों की दुकानें सजने लगी हैं।
 

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