अबूझमाड़ के जंगलों में महकेगी कॉफी, कोरापुट में ट्रेनिंग लेंगे अधिकारी

Coffee to flourish in the forests of Abujhmarh; officials to undergo training in Koraput Raipur chhattisgarh hindi news latest news khabargali

​रायपुर (खबरगली) छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ के वन क्षेत्रों में आजीविका संवर्धन, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय दोगुनी करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने एक बेहद अनूठी पहल की है। बस्तर के इस अंचल में अब बड़े पैमाने पर कॉफी की खेती प्रारंभ करने की तैयारी की जा रही है। इसी सिलसिले में कलेक्टर नारायणपुर ने भारत सरकार के कॉफी बोर्ड के विशेषज्ञों के साथ कुतुल, कच्चापाल, कोडलियार, ईरकभट्टी और तोके सहित आस-पास के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों का विस्तृत जमीनी निरीक्षण किया।

​जलवायु और मिट्टी कॉफी के लिए बेहद अनुकूल

निरीक्षण के दौरान कॉफी बोर्ड के विशेषज्ञ दल ने क्षेत्र की जलवायु, वार्षिक वर्षा, तापमान, मिट्टी की प्रकृति और समुद्र तल से ऊंचाई का गहन वैज्ञानिक अध्ययन किया। बोर्ड के अधिकारियों ने पुष्टि की कि अबूझमाड़ का प्राकृतिक वातावरण कॉफी उत्पादन के लिए पूरी तरह अनुकूल है। यहाँ 'कॉफी आधारित कृषि वानिकी मॉडल' विकसित कर बड़े पैमाने पर स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार से जोड़ा जा सकता है।

​चार साल में शुरू होगा उत्पादन, ग्रामीणों को मिलेगी स्थायी आय

​विशेषज्ञों के अनुसार, कॉफी के पौधों का करीब चार वर्षों तक रख-रखाव करने के बाद व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो जाता है। इसके बाद यह ग्रामीणों के लिए पीढ़ी-दर-पीढ़ी नियमित आय का जरिया बनेगा। इस पूरी परियोजना में स्थानीय स्व-सहायता समूहों (SHGs) और ग्रामीणों की सीधी भागीदारी तय की जाएगी, जिससे हर परिवार के कम से कम एक सदस्य को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रोजगार मिल सके। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य अबूझमाड़ के अनुकूल प्राकृतिक वातावरण का सही उपयोग करना, वनों का संरक्षण करना और स्थानीय ग्रामीणों को आय का एक स्थायी व मजबूत जरिया देना है। प्रारंभिक चरण में भूमि का चयन कर प्लांटेशन और स्थानीय स्तर पर नर्सरी की शुरुआत की जा रही है।

​ओडिशा के कोरापुट में ट्रेनिंग लेंगे जिले के अधिकारी

कॉफी बोर्ड के अधिकारियों के सुझाव पर कलेक्टर ने जिले के कृषि अधिकारियों और कर्मचारियों को तकनीकी प्रशिक्षण के लिए ओडिशा के कोरापुट भेजने के निर्देश दिए हैं। वहाँ अधिकारी कॉफी उत्पादन, पौध प्रबंधन, पर्यावरणीय आवश्यकताओं और तकनीकी पहलुओं की बारीकियों को सीखेंगे, ताकि वे आकर स्थानीय किसानों का मार्गदर्शन कर सकें।

​भविष्य में चाय की खेती की भी संभावना

विशेषज्ञ दल के साथ चर्चा के दौरान यह बात भी सामने आई कि अबूझमाड़ की वादियाँ चाय की खेती के लिए भी उपयुक्त हैं। इस पर कलेक्टर ने भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए चरणबद्ध कार्ययोजना (Phase-wise Action Plan) तैयार करने के निर्देश दिएl इस महत्वपूर्ण दौरे में भारत सरकार कॉफी बोर्ड से उप निदेशक, आंध्र प्रदेश, प्रभारी अधिकारी, क्षेत्रीय कॉफी अनुसंधान केंद्र, आंध्र प्रदेश, वरिष्ठ संपर्क अधिकारी, कोरापुट, जिला उप संचालक कृषि  और जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता सहित अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद थे।
 

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