धर्म और संस्कृति से जुड़ी नई पीढ़ी: समता संस्कार पाठशाला के 'ग्रैंड फनफेस्टा' में 600 बच्चों ने सीखी जीवन की अनमोल सीख

New generation connected with religion and culture: 600 children learnt precious lessons of life in the 'Grand Funfesta' of Samata Sanskaar Pathshala, childhood of Chhattisgarh-Odisha came together in Raipur: a unique confluence of children and teachers from 76 regions, convener Vandana Dhadiwal, Vikas Dhadiwal, Chhattisgarh, Khabargali

रायपुर के आंगन में उमड़ा छत्तीसगढ़-ओडिशा का बचपन: 76 अंचलों के बच्चों और शिक्षकों का अनूठा संगम

रायपुर (खबरगली ) छत्तीसगढ़ और ओडिशा के अंचलों में नई पीढ़ी को धर्म और संस्कारों से जोड़ने के उद्देश्य से समता संस्कार पाठशाला द्वारा एक भव्य आयोजन किया गया। राजधानी के कमल विहार स्थित माहेश्वरी भवन में रविवार, 5 अप्रैल को 'ग्रैंड पाठशाला फनफेस्टा' का रंगारंग आयोजन हुआ, जिसमें बच्चों ने खेल-खेल में जीवन के अनमोल संस्कार सीखे।

600 बच्चों और 135 शिक्षकों का महासंगम

इस फनफेस्टा में अंचल के 76 गांवों और शहरों से लगभग 600 बच्चे और 135 शिक्षिकाएं शामिल हुईं। पाठशाला की अंचल संयोजिका वंदना धाडीवाल और उनकी 9 क्षेत्रीय प्रभारियों की टीम ने इस कार्यक्रम को बेहद रोचक बनाया। दिनभर चले इस आयोजन में बच्चों के लिए गेम्स, मस्ती और लजीज व्यंजनों के साथ-साथ कई ज्ञानवर्धक गतिविधियां रखी गईं, जिसका सभी ने भरपूर आनंद लिया।

New generation connected with religion and culture: 600 children learnt precious lessons of life in the 'Grand Funfesta' of Samata Sanskaar Pathshala, childhood of Chhattisgarh-Odisha came together in Raipur: a unique confluence of children and teachers from 76 regions, convener Vandana Dhadiwal, Vikas Dhadiwal, Chhattisgarh, Khabargali

दिग्गजों की उपस्थिति ने बढ़ाया उत्साह

इस गरिमामयी आयोजन में श्री साधुमार्गी जैन संघ (छ.ग.-ओडिशा अंचल) के अध्यक्ष मोहनलाल बाफना, महिला समिति की अध्यक्ष वीणा श्रीश्रीमाल और रायपुर संघ के अध्यक्ष विजय मुथा विशेष रूप से उपस्थित रहे। साथ ही, श्रीमती चंदु बाफना (अध्यक्षा, साधुमार्गी महिला समिति), अमित सुराना (अध्यक्ष, समता युवा संघ) और श्रीमती कीर्ति सुराना (अध्यक्षा, समता बहु मंडल) समेत समाज के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों ने अपनी टीम के साथ शिरकत कर बच्चों का उत्साहवर्धन किया।

भटकाव रोकने और संस्कार रोपने की पहल

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों में बचपन से ही संस्कारों का बीजारोपण करना है। विकास धाडीवाल द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, वर्तमान समय में जो बच्चे धर्म और परिवार से दूर होकर गलत संगत की ओर बढ़ रहे हैं, उन्हें सही राह पर लाना ही इस पाठशाला का लक्ष्य है। आयोजकों का मानना है कि संस्कारी बच्चे ही आगे चलकर मजबूत समाज के आधार स्तंभ बनेंगे।

शिक्षिकाओं के लिए होंगे ट्रेनिंग कैंप

वंदना धाडीवाल ने बताया कि इस तरह के आयोजन भविष्य में अन्य शहरों में भी किए जाएंगे ताकि अधिक से अधिक बच्चे पाठशाला से जुड़ सकें। साथ ही, पाठशाला में सेवाएं दे रहीं शिक्षिकाओं के लिए समय-समय पर ट्रेनिंग कैंप भी लगाए जाएंगे, जिससे वे बच्चों को और अधिक रोचक तरीके से शिक्षा दे सकें। वर्तमान में समता संस्कार पाठशाला छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों में लगभग 1800 बच्चों को धर्म के साथ-साथ परिवार के प्रति व्यवहारिक शिक्षा देने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है।

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