मरीन ड्राइव या 'कचरा ड्राइव'? व्यवस्था की भूख ने छीन लिया रायपुर का सुकून

Marine Drive or 'Garbage Drive'? A hunger for order has robbed Raipur of its tranquility. A ground report on the public's tax waste and its plight. 'Marine Drive', the heart of Raipur, is now Telibandha Lake, Chhattisgarh khabargali

जनता के टैक्स की बर्बादी और बदहाली की ग्राउंड रिपोर्ट

रायपुर (खबरगली ) रायपुर का हृदय स्थल कहा जाने वाला 'मरीन ड्राइव' (तेलीबांधा तालाब) आज अपनी बदहाली पर आँसू बहा रहा है। जिस जगह को शहर की सुंदरता और नागरिकों के सुकून के लिए संवारा गया था, उसे निगम प्रशासन की लापरवाही और विज्ञापनों-ठेलों की 'पैसों की भूख' ने कचरे के ढेर में तब्दील कर दिया है। हालत यह है कि पाथवे पर कदम-कदम पर पॉलीथिन, जूठे दोने-पत्तल और बदबू आपका स्वागत करते हैं। 'स्मार्ट सिटी' का दंभ भरने वाले अधिकारियों को शायद यह नजर नहीं आता कि छोटे-छोटे डस्टबिन महज एक दिखावा बनकर रह गए हैं। रायपुर के मरीन ड्राइव पर आजकल सुकून कम और मच्छर ज्यादा मिलते हैं।

पूर्ववर्ती सरकार ने 'सुविधा' के नाम पर इसे बिगाड़ा था, तो वर्तमान प्रशासन पार्किंग और ठेलों से वसूली कर अपनी 'पेट पूजा' में व्यस्त है। अगल-बगल पसरी गंदगी और नाममात्र के डस्टबिन यह बताने के लिए काफी हैं कि स्वच्छता सर्वेक्षण की रैंकिंग सिर्फ कागजों तक सीमित है। आज मरीन ड्राइव एक पिकनिक स्पॉट नहीं, बल्कि एक डंपिंग यार्ड जैसा प्रतीत होता है, जहाँ सुकून की तलाश में जाने वालों को सिर्फ मानसिक तनाव मिल रहा है। 

विदेशों के 'स्टडी टूर' करने वाले जनप्रतिनिधियों के पास इंदौर की '56 दुकान' जैसी व्यवस्था देखने का वक्त नहीं है, क्योंकि वहां शायद 'कमीशन' का खेल नहीं चलता। नतीजा? पर्यटक अब यहाँ गर्व नहीं, शर्मिंदगी महसूस करते हैं। जनप्रतिनिधि विदेशों में क्या सीख कर आए, यह तो नहीं पता, पर रायपुर की जनता को यहाँ 'गंदगी का टूर' जरूर मुफ्त मिल रहा है। अगर आप किसी मेहमान को यहाँ ला रहे हैं, तो तैयार रहिए—सुकून मिले न मिले, शर्मिंदगी पक्की है।

Marine Drive or 'Garbage Drive'? A hunger for order has robbed Raipur of its tranquility. A ground report on the public's tax waste and its plight. 'Marine Drive', the heart of Raipur, is now Telibandha Lake, Chhattisgarh khabargali

नगर निगम प्रशासन से सीधे सवाल

वसूली बनाम सफाई: जब पार्किंग और ठेलों से लाखों का राजस्व वसूला जा रहा है, तो उस पैसे का इस्तेमाल मरीन ड्राइव की सफाई और डस्टबिन मैनेजमेंट में क्यों नहीं हो रहा?

दिखावे के डस्टबिन: क्या प्रशासन को यह समझ नहीं आता कि हजारों की भीड़ के लिए घरेलू आकार के छोटे डस्टबिन नाकाफी हैं? इन्हें बदला क्यों नहीं जा रहा?

विदेशी दौरा बनाम परिणाम: जनता के पैसों पर जो 'स्टडी टूर' हुए, उनका क्या आउटपुट निकला? क्या रायपुर की जनता को सिर्फ गंदगी और मच्छर ही मिलने थे?

इंदौर से दूरी क्यों? स्वच्छता में नंबर-1 इंदौर के '56 दुकान' मॉडल को लागू करने में क्या तकनीकी दिक्कत है या इच्छाशक्ति की कमी? जनप्रतिनिधि विदेशों में 'स्वच्छता' देखने जाते हैं, काश! पड़ोस के इंदौर से ही कुछ सीख लेते।

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