छत्तीसगढ़ और ओडिशा के मुख्यमंत्रियों ने रखा अपना-अपना पक्ष, केंद्रीय गृहमंत्री शाह की अध्यक्षता में बैठक

Chief Ministers of Chhattisgarh and Odisha present their respective viewpoints; meeting held under the chairmanship of Union Home Minister Shah. latest News hindi News raipur news khabargali

रायपुर(खबरगली) छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच पिछले चार दशक से चला आ रहा महानदी जल विवाद का मामला बातचीत के जरिए सुलझने के कागार पर पहुंच गया है। इसे लेकर गुरुवार को दिल्ली के कर्तव्य भवन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के बीच उच्च स्तरीय बैठक हुई। 

 

इसमें दोनों राज्य के तकनीकी टीम से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। बताया जाता है कि बैठक में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री ने अपने-अपने पक्षों को प्रमुखता से रखा। साथ ही यह भी संदेश देने का प्रयास किया कि आपसी सहमति से इस विवाद को सुलझाया जाएगा। वर्तमान में केंद्र और दोनों राज्यों में भाजपा की सरकार है, इसलिए बातचीत के जरिए इसका समाधान निकालने का प्रयास हो रहा है।

 

- यह है ओडिशा का आरोप: 

 

छत्तीसगढ़ ने महानदी और उसकी सहायक नदियों पर बिना परामर्श के कई बैराज, एनीकट और बांध बना लिए हैं। इससे हीराकुंड जलाशय का जलस्तर घट रहा है। यहां के किसानों की खेती और पेयजल आपूर्ति प्रभावित होती है।

 

- यह है छत्तीसगढ़ का पक्ष

 

ओडिशा के आरोपों को छत्तीसगढ़ सरकार पहले ही सिरे से खारिज कर दिया है। सरकार का कहना है कि वह अपने हिस्से के पानी का इस्तेमाल अपने किसानों, पेयजल और विकास कार्यों के लिए कर रही है।

 

 

1983 से चल रहा है विवाद

 

महानदी जल विवाद की शुरुआत अविभाजीत मध्य प्रदेश के समय वर्ष 1982 से हुई थी। विवाद का मौजूदा कानूनी चरण 2016 में तेज हुआ। ओडिशा की शिकायत पर केंद्र ने पहले बातचीत के जरिए समाधान के लिए 2017 में नेगोशिएशन कमेटी बनाई, लेकिन समाधान नहीं निकला। ओडिशा ने इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में मामला उठाया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद केंद्र ने 12 मार्च 2018 को महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया।

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