नान घोटाला और कोयला घोटाला के बाद छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा घोटाला आबकारी घोटाला- शैलेश नितिन त्रिवेदी

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 रमन सरकार में आबकारी विभाग में 10 साल तक ओएसडी रहे समुंद्र सिंह के ठिकानों की जांच में करोड़ों की संपत्ति मिली, कई लॉकर, खाते मिले, छापे के बाद से समुंद्र सिंह पत्नी सहित फरार

रायपुर (खबरगली) छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री एवं कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि नान घोटाला और कोयला घोटाला के बाद छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े घोटाले आबकारी घोटाले में 1500 करोड़ के गोलमाल से भाजपा के 15 वर्षों के शासनाकाल में की गयी लूट भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी स्पष्ट हो गयी है. आरोपी समुद्र सिंह के घर छापे में बरामद अकूत धन संपदा 15 वर्षों तक की गई छत्तीसगढ़ की लूट का जीता जागता सबूत है. संविदा के अधिकारियों के द्वारा सैकड़ों करोड़ का गोलमाल जिस तरह से किया गया उससे सत्ता के शीर्ष के संरक्षण में छत्तीसगढ़ की जनता के खजाने की की गई लूट उजागर हो गयी है. लूटने वाले अधिकारी सेवा समाप्ति के बाद छत्तीसगढ़ से बाहर जा बसे क्योंकि छत्तीसगढ़ से उनका नाता सिर्फ जनता के खजाने के लूटमार तक ही सीमित थी. इन संविदा अधिकारियों को छत्तीसगढ़ से नहीं था कोई सरोकार और इनने सिर्फ नौकरी को और राजनीति को बनाया पैसों का व्यापार.

 उल्लेखनीय है कि रमन सरकार में आबकारी विभाग में 10 साल तक ओएसडी रहे समुंद्र सिंह के ठिकानों में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) के छापे के बाद करोड़ों की बेनामी संपत्ति टीम को मिली है. संपत्ति के अलावा 20 से ज्यादा बैंक अकाउंट और 20 इंश्योरेंस पॉलिसी भी मिली. अब तक मिली प्रॉपर्टी की कीमत का अनुमान करीब 15 करोड़ रुपए लगाया गया है. इसके अलावा मध्यप्रदेश के अनूपपुर में 40 से 50 एकड़ का एक फॉर्म हाउस मिला है, जिसका मूल्यांकन बाकी है. बैंक लॉकरों और बैंक खातों की भी जांच होनी बाकी है. छापे के बाद से समुंद्र सिंह पत्नी सहित फरार हैं.
     तथ्य़ों के मुताबिक समुंद्र सिंह ने साल 2012 से 2017 के बीच संविदा में ओएसडी के पद पर रहते हुए षड्यंत्रपूर्वक काम किया और राज्य शासन को करोड़ों की क्षति पहुंचाई. छत्तीसगढ़ आबकारी नियमों के मुताबिक राज्य शासन को हर वर्ष देशी और विदेशी शराब की अधिकतम और न्यूनतम रिटेल दर का निर्धारण करना जरूरी होता है. जबकि 2012 से 2017 के बीच निविदाकर्ताओं को बिना कारण के बहुत ज्यादा मुनाफा देकर रिटेलरों और ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया गया.
    समुंद्र सिंह ने सेवानिवृत्ति के बाद 10 सालों तक रमन सरकार में आबकारी विभाग में बतौर ओएसडी काम किया. जबकि राज्य शासन के नियमानुसार संविदा में रहने वाले किसी भी अफसर को वित्तीय-प्रशासनिक अधिकार प्राप्त नहीं है. इसके बावजूद समुद्र सिंह के द्वारा वित्तीय निर्णय लिए गए. इनके द्वारा नोटशीट पर संबंधित मंत्री का अनुमोदन लिए बिना ही आदेश जारी किया गया. दिसंबर 2018 में सरकार बदली तो इसके फौरन बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था.

 

 

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