CGPSC घोटाला: ED की पांच ठिकानों पर छापेमारी, उत्कर्ष चंद्राकर गिरफ्तार; जानिए जांच में क्या-क्या आया सामने

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रायपुर (खबरगली ) छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की वर्ष 2020 और 2021 की राज्य सेवा परीक्षाओं में कथित अनियमितता, प्रश्नपत्र लीक और भ्रष्टाचार के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ED के रायपुर जोनल कार्यालय की टीम ने 1 सितंबर 2026 को रायपुर, दुर्ग, धमतरी और जशपुर जिलों में पांच ठिकानों पर PMLA के तहत तलाशी अभियान चलाया। इसी कार्रवाई के दौरान ED ने उत्कर्ष चंद्राकर को गिरफ्तार किया है। एजेंसी के मुताबिक, यह गिरफ्तारी कथित तौर पर अपराध से अर्जित आय से जुड़ी गतिविधियों में उनकी भूमिका सामने आने के बाद की गई है।

CGPSC घोटाले की जांच में ED की बड़ी कार्रवाई

ED के अनुसार, CGPSC परीक्षा मामले की मनी लॉन्ड्रिंग जांच EOW-ACB रायपुर और CBI-ACB रायपुर द्वारा दर्ज दो FIR के आधार पर शुरू की गई थी। इन मामलों में तत्कालीन CGPSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी सहित अन्य लोगों पर परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितता, हेरफेर और भ्रष्टाचार के आरोप हैं। एजेंसी का कहना है कि जांच के दौरान परीक्षा प्रक्रिया में कथित तौर पर प्रश्नपत्र लीक करने और चुनिंदा अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने से संबंधित कई अहम तथ्य सामने आए हैं।

रिश्तेदारों और चयनित अभ्यर्थियों तक पहुंचाए गए प्रश्नपत्र का आरोप

ED के मुताबिक, CGPSC परीक्षाओं के प्रश्नपत्र कथित तौर पर निजी बिचौलियों के माध्यम से आरोपियों के रिश्तेदारों और चुनिंदा अभ्यर्थियों तक पहुंचाए गए। जांच एजेंसी का आरोप है कि इसके बदले अवैध रकम ली गई और इसी प्रक्रिया के जरिए डिप्टी कलेक्टर तथा डिप्टी पुलिस अधीक्षक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कथित तौर पर फर्जी तरीके से चयन कराने की कोशिश की गई।

उत्कर्ष और डॉ. विकास चंद्राकर पर क्या आरोप?

ED के अनुसार, उत्कर्ष चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने CGPSC-2021 का कथित लीक प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का भरोसा देकर नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों से नकद रकम जुटाई। जांच में ED ने तीन करोड़ रुपये से अधिक की अपराध से अर्जित आय (Proceeds of Crime) का पता चलने का दावा किया है। एजेंसी के अनुसार, इसमें से करीब 2.80 करोड़ रुपये अनिल चंद्राकर को सौंपे जाने की बात सामने आई है।

तत्कालीन मुख्यमंत्री के PA के नाम और प्रभाव के इस्तेमाल का आरोप

ED ने आरोप लगाया है कि उत्कर्ष चंद्राकर ने तत्कालीन मुख्यमंत्री के निजी सहायक और अपने मामा के.के. चंद्रवंशी के नाम, पद और प्रभाव का इस्तेमाल अभ्यर्थियों को प्रभावित करने तथा उनसे रकम वसूलने के लिए किया। जांच एजेंसी के अनुसार, तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय में पदस्थ एक विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी के प्रभाव के इस्तेमाल से संबंधित तथ्य भी जांच में सामने आए हैं।

मोबाइल और बैंक खातों से मिले साक्ष्यों का किया गया विश्लेषण

ED ने बताया कि इससे पहले 3 जून 2026 को भी CGPSC मामले में तलाशी कार्रवाई की गई थी। एजेंसी के अनुसार, जांच के दौरान जुटाए गए दस्तावेजों, PMLA की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों, मोबाइल फोन से प्राप्त डिजिटल साक्ष्यों और बैंक खातों के विश्लेषण से महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई। ED का दावा है कि इन साक्ष्यों के आधार पर उत्कर्ष चंद्राकर की अपराध से अर्जित आय से जुड़ी गतिविधियों में संलिप्तता सामने आई।

PMLA की धारा 19 के तहत उत्कर्ष चंद्राकर गिरफ्तार

ED के मुताबिक, साक्ष्यों के आधार पर उत्कर्ष चंद्राकर को 1 सितंबर 2026 को PMLA की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया। तलाशी अभियान के दौरान एजेंसी ने कथित तौर पर आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, वित्तीय रिकॉर्ड, संपत्ति से संबंधित दस्तावेज और जांच से जुड़े अन्य साक्ष्य जब्त किए हैं।

CGPSC घोटाला मामले में आगे क्या होगा?

ED के अनुसार, मामले में जांच अभी जारी है। एजेंसी तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों और वित्तीय लेन-देन से संबंधित रिकॉर्ड का विश्लेषण कर रही है। CGPSC की 2020 और 2021 की राज्य सेवा परीक्षाओं से जुड़े इस मामले में आगे की जांच के दौरान और लोगों की भूमिका तथा कथित वित्तीय लेन-देन सामने आने की संभावना है।

नोट: ऊपर बताए गए आरोप और जांच से जुड़े तथ्य ED द्वारा जारी जानकारी और जांच एजेंसी के दावों पर आधारित हैं। मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

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