RTI खुलासे के बाद अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने उठाए सवाल; CVC और EOW/ACB में शिकायत करने तथा बैंक गारंटी जब्त करने की मांग
रायपुर (खबरगली)। छत्तीसगढ़ में कस्टम मिलिंग चावल की गुणवत्ता और सरकारी खाद्यान्न प्रबंधन को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हुआ है। सूचना का अधिकार (RTI) के तहत भारतीय खाद्य निगम (FCI) के रायपुर मंडल कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, 1 जनवरी 2023 से 28 अक्टूबर 2026 तक रायपुर मंडल में 77,402.25 मीट्रिक टन कस्टम मिल्ड राइस (CMR) को अमानक बताकर खारिज किया गया। इस आंकड़े के सामने आने के बाद खारिज चावल की भरपाई, संबंधित राइस मिलरों के खिलाफ कार्रवाई और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
आरटीआई कार्यकर्ता, अधिवक्ता एवं राजनेता मनोज सिंह ठाकुर ने इस मामले में कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि यदि संबंधित मिलरों ने निर्धारित गुणवत्ता के अनुरूप चावल जमा नहीं किया है, तो इसकी विस्तृत जांच होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी है कि कार्रवाई नहीं होने पर केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC), आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW/ACB) में शिकायत दर्ज कराने के साथ हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की जाएगी।
RTI से सामने आया 77,402 मीट्रिक टन अमानक चावल का आंकड़ा
मनोज सिंह ठाकुर के अनुसार, FCI के रायपुर मंडल कार्यालय ने पत्र क्रमांक DO RYP-35011/60/2026-35, दिनांक 28 अक्टूबर 2026 के माध्यम से यह जानकारी दी है कि संबंधित अवधि में 77,402.25 मीट्रिक टन कस्टम मिल्ड राइस को अमानक पाए जाने पर अस्वीकार किया गया। इस आंकड़े के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि खारिज किए गए चावल के बदले संबंधित मिलरों से कितना मानक चावल जमा कराया गया? यदि किसी प्रकार की आर्थिक वसूली या अन्य कार्रवाई की गई है, तो उसका विवरण क्या है?
इन सवालों पर स्पष्ट और दस्तावेजी जानकारी सार्वजनिक किए जाने की मांग की जा रही है। हालांकि, उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि पूरी मात्रा का चावल गायब हुआ है या सरकारी खजाने को निश्चित रूप से वित्तीय नुकसान पहुंचा है। इसके लिए संबंधित रिकॉर्ड, रिकवरी और विभागीय कार्रवाई की स्थिति की जांच जरूरी है।
FCI और मार्कफेड की जवाबदेही पर उठे सवाल
अमानक चावल की भरपाई का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग छत्तीसगढ़ में धान की कस्टम मिलिंग के तहत मिलरों को धान देकर निर्धारित गुणवत्ता के अनुरूप चावल जमा कराया जाता है। ऐसे में अमानक चावल अस्वीकार होने की स्थिति में संबंधित मिलरों से मानक चावल की आपूर्ति, कमी की भरपाई और अनुबंध के अनुसार कार्रवाई का पूरा रिकॉर्ड महत्वपूर्ण हो जाता है।
मनोज सिंह ठाकुर ने आरोप लगाया है कि इतने बड़े पैमाने पर चावल रिजेक्ट होने के बावजूद कार्रवाई और रिकवरी की स्थिति स्पष्ट नहीं है। उन्होंने FCI और राज्य की संबंधित एजेंसी मार्कफेड से जवाबदेही तय करने की मांग की है।
बैंक गारंटी जब्त करने और FIR दर्ज करने की मांग
ठाकुर का कहना है कि यदि जांच में संबंधित मिलरों की अनुबंध संबंधी चूक या किसी प्रकार की अनियमितता प्रमाणित होती है, तो नियमानुसार बैंक गारंटी जब्त करने, बकाया राशि की वसूली और जरूरत पड़ने पर आपराधिक कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने इस मामले में FIR दर्ज करने की मांग भी की है। हालांकि, किसी मिलर या अधिकारी के खिलाफ आपराधिक दायित्व तय करने के लिए उपलब्ध साक्ष्यों, अनुबंध की शर्तों और संबंधित कानूनों के आधार पर जांच आवश्यक होगी।
विजिलेंस जांच नहीं होने का दावा, स्वतंत्र जांच की मांग
मनोज सिंह ठाकुर के मुताबिक, FCI से प्राप्त RTI जवाब में इस मामले में केंद्रीय सतर्कता दल द्वारा जांच या निरीक्षण किए जाने की जानकारी नहीं मिली है। उन्होंने सवाल उठाया है कि इतनी बड़ी मात्रा में अमानक चावल अस्वीकार किए जाने के मामले में जिम्मेदारी तय करने के लिए उच्चस्तरीय जांच क्यों नहीं कराई गई।
उन्होंने मांग की है कि चावल की गुणवत्ता जांच, अस्वीकृति के कारणों, संबंधित मिलरों के रिकॉर्ड, चावल की भरपाई और विभागीय कार्रवाई की स्वतंत्र जांच कराई जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि किसी अधिकारी या एजेंसी की लापरवाही सामने आई है या नहीं।
किसानों और धान उपार्जन व्यवस्था पर पड़ सकता है असर
कस्टम मिलिंग और चावल जमा करने की प्रक्रिया में बाधा आने से धान के भंडारण, गोदामों की उपलब्धता और आगामी उपार्जन व्यवस्था पर दबाव पड़ने की आशंका रहती है। यदि चावल की आपूर्ति और उठाव की प्रक्रिया प्रभावित होती है, तो इसका असर पूरी खाद्यान्न व्यवस्था पर पड़ सकता है। हालांकि, 77,402.25 मीट्रिक टन अमानक चावल अस्वीकार होने के कारण धान उपार्जन या किसानों को हुए किसी प्रत्यक्ष नुकसान की पुष्टि के लिए अलग से आंकड़ों और विभागीय रिकॉर्ड की जांच आवश्यक है।
CVC और EOW/ACB में शिकायत, हाईकोर्ट में PIL की तैयारी,मनोज सिंह ठाकुर ने दी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
मनोज सिंह ठाकुर ने कहा कि वह इस मामले को केवल विभागीय शिकायत तक सीमित नहीं रखेंगे। उन्होंने कहा कि यदि संबंधित एजेंसियां डिफॉल्ट मिलरों के विरुद्ध जांच, रिकवरी और नियमानुसार कार्रवाई नहीं करती हैं, तो वे दस्तावेजों के साथ केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC), नई दिल्ली तथा राज्य की आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW/ACB) में शिकायत दर्ज कराएंगे।
उन्होंने पूरे मामले की जांच CBI या किसी उच्चस्तरीय समिति से कराने की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर करने की भी बात कही है। ठाकुर के अनुसार, उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी खाद्यान्न प्रबंधन में पारदर्शिता बनी रहे और यदि किसी स्तर पर अनियमितता या वित्तीय नुकसान हुआ है, तो उसकी जिम्मेदारी तय हो।
अब किन सवालों के जवाब जरूरी?
इस मामले में आगे की कार्रवाई के लिए कुछ प्रमुख बिंदुओं पर स्पष्टता जरूरी है:
1. 77,402.25 मीट्रिक टन अमानक चावल में से कितनी मात्रा दोबारा मानक गुणवत्ता में जमा कराई गई?
2. संबंधित राइस मिलरों के खिलाफ कितनी वसूली, अनुबंधात्मक कार्रवाई या अन्य दंडात्मक कदम उठाए गए?
3. कितने मामलों में बैंक गारंटी जब्त की गई या जब्ती की प्रक्रिया शुरू हुई?
4. अमानक चावल की गुणवत्ता जांच किस प्रक्रिया से हुई और उसे खारिज करने के प्रमुख कारण क्या थे?
5. क्या इस मामले में किसी स्तर पर विभागीय या सतर्कता जांच प्रस्तावित है?
इन सवालों पर FCI, मार्कफेड और संबंधित विभागों की विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल, RTI से सामने आए आंकड़ों ने चावल की गुणवत्ता, रिकवरी और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अब निगाहें संबंधित एजेंसियों की प्रतिक्रिया, दस्तावेजी खुलासों और प्रस्तावित कानूनी कार्रवाई पर टिकी हैं।
नोट: यह समाचार उपलब्ध कराई गई प्रेस विज्ञप्ति और उसमें वर्णित RTI जानकारी पर आधारित है। FCI, मार्कफेड तथा संबंधित विभागों का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी शामिल किया जाना चाहिए। किसी व्यक्ति या संस्था की आपराधिक संलिप्तता अभी जांच से प्रमाणित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं की जा रही है।
जारीकर्ता: मनोज सिंह ठाकुर, अधिवक्ता, आरटीआई कार्यकर्ता एवं राजनेता।
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