ज्योत, मेंहदी, चुनरी, गजरा, बधाई, प्रकट उत्सव मनाया राजस्थान के रामू मारवाड़ी ने किया हैरतअंगेज नृत्य
रायपुर (खबरगली) श्री देवसर वाली माता का भव्य, दिव्य व अलौकिक चतुर्थ मंगलपाठ एस.एन. पैलेस में धूमधाम से मनाया गया। देवसर धाम से आए मुख्य पुजारी वेदप्रकाश जी ने पूजा-अर्चना के साथ मंगलपाठ का शुभारंभ किया। पूरे परिसर को कोलकाता के कारीगरों द्वारा फूलों से आकर्षक पंडाल को सजाया गया था। जात-धोक, सवामणि, छप्पन भोग, मेवा भोग, फल भोग माता को अर्पित किया गया। मेहंदी उत्सव, चुनरी उत्सव, गजरा उत्सव व बधाई उत्सव भी मनाया गया। माता को 51 मीटर लंबी चुनरी व 11 फीट लंबा गजरा अर्पित किया गया।
देवसर माता सेवा समिति द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मुंबई से आए रामअवतार अग्रवाल व कोलकाता के मधुसूदन शर्मा ने देवसर वाली माता का संगीतमय नृत्य नाटिका सहित मंगलपाठ का वाचन किया। मंगलमूर्ति नृत्य नाटिका द्वारा सुंदर झांकी प्रस्तुत की गई। वहीं कार्यक्रम में पांच राज्यों के कलाकारों ने अपनी कला से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध किया।
जोधपुर राजस्थान के अंतर्राष्ट्रीय कलाकार रामू मारवाड़ी, बिरमा बावरी व टीम द्वारा सिर पर 11 मटकी रखकर फिरकी की तरह नृत्य किया। 5 कांच के ग्लास के ऊपर मटकी रखकर व मटकी से पानी छलकाकर अद्भुत नृत्य प्रस्तुत किया। बिहार के जमालपुर की भजन गायिका अंकिता शर्मा एवं रायपुर के तरूण सोनी ने माता व कृष्ण के भजनों के जरिए श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। रायपुर के मास्टर कपीश अग्रवाल ने बांसूरी के जरिए राम व कृष्ण के भजनों की धून बजाई।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री की धर्मपत्नि कौशल्या देवी साय ने देवसर वाली माता को माल्यार्पण कर प्रदेशवासियों के खुशहाली की कामना की। उन्होंने वेदप्रकाश जी से आशीर्वाद लिया। उन्होंने अपना उद्बोधन श्लोक के साथ शुरू किया। अपने आप को पहचानों आप कौन है, कहां से आए है, आपका उद्देश्य क्या है। आयोजन समिति को शुभकानाएं देते हुए कहा कि आयोजन काफी सफल है। इसे आगे भी जारी रखते हुए अपनी पीढ़ी के लिए बिंदु दर बिंदु सौंपे। बच्चों का नाम चिंटु, पिंटु, मिंटु ना रखें बल्कि सार्थक नाम रखेंं। मैं जब भी बाहर से आती हूं तो नजर दोष से बचने के लिए हर मौसम में स्नान करती हूं। हम स्त्रियों का कई रूप है। हमें मां दुर्गा से पावर से मिलता है। हम ही सृष्टि को बनाते है और हम ही मिटाते है। हम ही काली है, हम ही दुर्गा है, हम ही सरस्वती है, हम झांसी की रानी है, हम ही अहिल्या बाई होल्कर है और मैं कौशल्या हूं। यह नारी का युग है। गुरु सत्ता ने घर से बाहर जाने की अनुमति दी। मैं बड़ा संयमित जीवन जीती हूं, देर रात तक भोजन नहीं करती हूं। बच्चों को बोलकर कुछ काम कराने की बजाए उन्हें खुद कर सीखाएं। जिस घर के बुजुर्ग मुस्कुराते मिलेंगे वहां हमेशा खुशहाली रहती है। हम कर्म लेकर आए है इसलिए इस पंडाल में मौजूद है नहीं तो लाखों लोग सडक़ों पर घूम रहे है, कोई डीजे पर नाच रहा है। आयोजन के संबंध में कहा मैं यहां आकर अपने आप को सौभाग्यशाली महसूस कर रही हूं। इस तरह के आयोजनों से धर्म के प्रति लोगों में जागरुकता आती है। इतनी बड़ी संख्या में आप लोग सहपरिवार आए है। मैंने देखा महिलाएं, बुजुर्ग, बच्चे व युवा सभी शामिल है।
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