इंदौर (khabargali) इंदौर के प्रीति नगर में हुआ अग्निकांड महज एक दुर्घटना नहीं बल्कि एक बड़ी तबाही की दस्तक हो सकती थी। तिलक थाना क्षेत्र के इस रिहायशी इलाके में मनोज पुगलिया के जिस घर में आग लगी, वह अंदर से किसी बारूद के ढेर से कम नहीं था। शुरुआती जांच और मौके पर मौजूद बचाव दल के मुताबिक, घर के भीतर करीब 12 गैस सिलेंडर रखे हुए थे, जिनमें से 3 कमर्शियल थे।
ई-कार में हुआ था शॉर्ट सर्किट
हादसे की शुरुआत घर के बाहर खड़ी इलेक्ट्रॉनिक कार की चार्जिंग के दौरान हुए शॉर्ट सर्किट से हुई। आग ने जैसे ही घर के मुख्य द्वार को अपनी चपेट में लिया, वहां रखे गैस सिलेंडर बम की तरह फटने लगे। धमाके इतने तेज थे कि लगा जैसे कोई बड़ा विस्फोट हुआ हो। मौके पर मौजूद रेस्क्यू टीम ने बताया कि सिर्फ 4 सिलेंडर फटने से ही पूरा मकान खंडहर में बदल गया और घर में मौजूद रिश्तेदारों समेत 8 लोगों की जलकर मौत हो गई।
बच गए बाकी सिलेंडर वरना दहल जाता पूरा मोहल्ला
दसे के बाद जब दमकल विभाग और पुलिस की टीम अंदर दाखिल हुई, तो नजारा देखकर उनके भी हाथ-पांव फूल गए। घर में और सिलेंडर रखे थे, जो आग की लपटों के बीच तो थे, लेकिन फटने से बच गए। स्ट्रक्चरल एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर ये सभी सिलेंडर एक साथ फट जाते, तो ब्लास्ट का शॉकवेव इतना ज्यादा होता कि आसपास के 4-5 मकान भी जमींदोज हो सकते थे। यह इंदौर के इतिहास का सबसे भीषण रिहायशी अग्निकांड बन सकता था।
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