9 जिलों के रसोइयों को मिली राशि, हड़ताल स्थगित; 5 अक्टूबर तक का दिया था अल्टीमेटम

Cooks from 9 districts receive payment, strike called off; ultimatum had been set for October 5. raipur hindi news chhattisgarh news khabargali

रायपुर (खबरगली) सरकारी स्कूलों में काम करने वाले रसोइयों की हड़ताल दो दिन बाद खत्म हो गई है। लेकिन दूसरे दिन सुबह से ही रसोइयों और प्रशासन के बीच तनातनी दिखाई दी। छत्तीसगढ़ मध्यान्ह भोजन रसोइया संगठन की ओर से हड़ताल के तहत मंगलवार को लोक शिक्षण संचालनालय और मंत्री निवास घेराव करना था। संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार, सुबह होते ही संगठन के प्रदेश अध्यक्ष नीलू ओगरे और अन्य लोगों को हाउस अरेस्ट कर लिया गया। उसके बाद पुलिस की ओर से डीपीआई ले जाने की बात कहते हुए थाने ले गए। जहां लगभग साढ़े चार घंटे तक रखा गया। इसके साथ ही विभाग की ओर से रसोइयों के खातों में राशि डाली जाने लगी। इसके बाद संगठन ने हड़ताल स्थगित करने का निर्णय लिया। बता दें कि राज्य में 56 हजार 895 माध्यमिक व प्राथमिक शालाओं में 87 हजार 600 रसोइए काम कर रहे हैं।

संगठन का दावा- अधूरी राशि मिली

प्रदेश अध्यक्ष नीलू ओगरे ने बताया कि जानकारी मिली है कि केवल 9 जिलों में ही रसोइयों के अकाउंट में पैसे डाले गए हैं वह भी आधे-अधूरे हैं। सिर्फ दो महीने का पैसा ही दिया गया है। उन्होंने कहा पांच अक्टूबर तक सभी जिलों में और पूरे माह के पैसे नहीं आएंगे तो फिर से हड़ताल में जाएंगे।


स्कूल खुलने के बाद से नहीं मिला पैसा

स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से स्कूल खुलने के बाद यानी 16 जून से न तो रसोइयों को और न ही मध्यान्ह भोजन के लिए से एक भी रुपया नहीं दिया गया है। जिसके कारण स्कूल खुलने के बाद से बच्चों की रसोई उधार के पैसों से चल रही थी। छत्तीसगढ़ मध्यान्ह भोजन रसोइया संगठन की ओर से कई बार विभाग के अधिकारियों और मंत्री से मिलने के बाद भी पैसे नहीं मिले थे। जिसके कारण संगठन की ओर से हड़ताल करने का निर्णय लिया गया था।

16 जून से  नहीं दिया एक भी रुपया

स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से स्कूल खुलने के बाद यानी 16 जून से न तो रसोइयों को और न ही मध्यान्ह भोजन के लिए से एक भी रुपया नहीं दिया गया है। जिसके कारण स्कूल खुलने के बाद से बच्चों की रसोई उधार के पैसों से चल रही थी। छत्तीसगढ़ मध्यान्ह भोजन रसोइया संगठन की ओर से कई बार विभाग के अधिकारियों और मंत्री से मिलने के बाद भी पैसे नहीं मिले थे। जिसके कारण संगठन की ओर से हड़ताल करने का निर्णय लिया गया था।


 

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