छत्तीसगढ़ में राज्य अलंकरण सम्मानितों को सरकारी नौकरी में मिले 5 साल की आयु छूट, मुख्यमंत्री को पत्र

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छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी ने राज्य कैबिनेट की बैठक में निर्णय लेने का किया आग्रह

रायपुर (खबरगली ) छत्तीसगढ़ में राज्य अलंकरण से सम्मानित विभूतियों और युवाओं को सरकारी नौकरियों में विशेष आयु छूट देने की मांग उठी है। छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर राज्य के सभी राज्य अलंकरण प्राप्त लोगों को शासकीय सेवाओं की सीधी भर्ती में अधिकतम आयु सीमा में पांच वर्ष की एकसमान छूट देने का आग्रह किया है।

सोसायटी के संयोजक डॉ. कुलदीप सोलंकी ने इस संबंध में  होने वाली राज्य कैबिनेट की बैठक में निर्णय लेने की मांग की है। उनका कहना है कि राज्य की प्रतिभाओं को सम्मान देने के साथ उन्हें सरकारी सेवा में अपनी योग्यता साबित करने का अवसर भी मिलना चाहिए।

राज्य अलंकरण सम्मानितों को आयु सीमा में छूट देने की मांग

डॉ. कुलदीप सोलंकी के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर के कुछ पुरस्कार प्राप्त युवाओं और खिलाड़ियों को सरकारी नौकरियों में आयु सीमा में छूट का लाभ मिलता है, लेकिन राज्य के अन्य प्रतिष्ठित अलंकरणों से सम्मानित विभूतियां इस सुविधा से वंचित हैं। छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी का कहना है कि राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लोगों के लिए भी समान अवसर सुनिश्चित किए जाने चाहिए। इसके लिए राज्य के सभी अलंकरणों को आयु छूट के दायरे में शामिल करने की मांग की गई है।

34 क्षेत्रों में दिए जाते हैं राज्य के प्रतिष्ठित सम्मान

मुख्यमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर हर वर्ष विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली विभूतियों को राज्य अलंकरण से सम्मानित किया जाता है। इनमें विधि, चिकित्सा, साहित्य, कला, पत्रकारिता, खेल, कृषि और सामाजिक चेतना सहित लगभग 34 क्षेत्र शामिल हैं।

इन प्रतिष्ठित सम्मानों में प्रमुख रूप से शामिल हैं: बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल सम्मान पंडित सुंदरलाल शर्मा सम्मान दाऊ मंदराजी सम्मान चंदूलाल चंद्राकर स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार धन्वंतरि सम्मान गुंडाधूर सम्मान मिनीमाता सम्मान डॉ. खूबचंद बघेल सम्मान

सोसायटी का कहना है कि इन सम्मानों से अलंकृत लोगों को पुरस्कार राशि और प्रशस्ति पत्र के अतिरिक्त सरकारी नौकरियों में आयु छूट जैसा कोई समान लाभ नहीं मिलता। ऐसे में इस व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है।

खेल पुरस्कारों की तर्ज पर सभी राज्य अलंकरणों को मिले लाभ

छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी ने सामान्य प्रशासन विभाग के 1 दिसंबर 2006 के एक पुराने पत्र का हवाला देते हुए कहा है कि उस समय कुछ विशिष्ट खेल पुरस्कारों और राष्ट्रीय युवा पुरस्कार से सम्मानित खिलाड़ियों एवं युवाओं को सरकारी नौकरियों में अधिकतम आयु सीमा में पांच वर्ष की छूट देने का प्रावधान किया गया था। इन सम्मानों में शहीद राजीव पाण्डेय पुरस्कार, गुंडाधूर सम्मान, महाराजा प्रवीरचन्द्र भंजदेव सम्मान और राष्ट्रीय युवा पुरस्कार शामिल बताए गए हैं।

सोसायटी के मुताबिक, आयु छूट का यह लाभ कुछ चुनिंदा पुरस्कारों तक सीमित रहने के कारण साहित्य, कला, पत्रकारिता, चिकित्सा और अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले सम्मानित लोगों को समान अवसर नहीं मिल पा रहा है।

सरकार से समान अवसर सुनिश्चित करने का आग्रह

सोसायटी ने मांग की है कि खेल पुरस्कारों की तरह अन्य सभी राज्य अलंकरणों से सम्मानित व्यक्तियों को भी सरकारी सेवाओं की सीधी भर्ती में पांच वर्ष की विशेष आयु छूट देने का स्पष्ट प्रावधान किया जाए। इससे विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लोगों को प्रशासनिक सेवाओं में अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल सकेगा।

38 से बढ़ाकर 45 वर्ष की गई अधिकतम आयु सीमा का दिया हवाला

डॉ. कुलदीप सोलंकी ने सरकारी सेवाओं और उच्च पदों पर आवेदन के लिए अधिकतम आयु सीमा 38 वर्ष से बढ़ाकर 45 वर्ष किए जाने के राज्य सरकार के निर्णय की सराहना की है। उन्होंने इसी नीति को आगे बढ़ाते हुए राज्य अलंकरण प्राप्त सभी विभूतियों को पांच वर्ष की अतिरिक्त आयु छूट देने का आग्रह किया है। सोसायटी का मानना है कि इस कदम से राज्य की प्रतिभाओं को सम्मान देने के साथ भर्ती प्रक्रिया में समान अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में भी पहल होगी।

कैबिनेट बैठक में निर्णय लेने की मांग

छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आग्रह किया है कि राज्य अलंकरण से सम्मानित विभूतियों और युवाओं को सरकारी सेवाओं की सीधी भर्ती में पांच वर्ष की आयु छूट देने के प्रस्ताव पर राज्य कैबिनेट की बैठक में विचार कर निर्णय लिया जाए। अब इस मांग पर राज्य सरकार का रुख महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल यह छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी की ओर से की गई मांग है; इस संबंध में किसी नए सरकारी निर्णय की पुष्टि नहीं हुई है।

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