रायपुर (खबरगली) छत्तीसगढ़ में मेडिकल पीजी छात्रों के स्टाइपेंड को लेकर चल रहा विवाद फिलहाल खत्म हो गया है। राज्य सरकार ने पीजी मेडिकल छात्रों के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी का फैसला लिया है। अब उन्हें हर माह 94 हजार रुपए तक स्टाइपेंड मिलेगा। बढ़ा हुआ स्टाइपेंड अक्टूबर से दिए जाने की बात कही गई है। स्टाइपेंड बढ़ाने के साथ ही डेंटल पीजी छात्रों को भी राहत दी गई है। डेंटल के पीजी छात्रों का स्टाइपेंड भी मेडिकल पीजी छात्रों के समान किए जाने का निर्णय लिया गया है। सरकार के इस फैसले के बाद छात्रों ने अपनी आंदोलनात्मक गतिविधियां समाप्त करने का निर्णय लिया है।
18 सितंबर से इमरजेंसी सेवाएं बंद करने की थी तैयारी
स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदेश के मेडिकल पीजी छात्र लंबे समय से मांग उठा रहे थे। मांग पूरी नहीं होने पर छात्रों ने चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया था। इसके तहत पहले ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार किया गया। इसके बाद मांगों पर सुनवाई नहीं होने की स्थिति में 18 सितंबर से इमरजेंसी सेवाओं को भी प्रभावित करने की तैयारी थी। हालांकि सरकार की ओर से स्टाइपेंड बढ़ाने का निर्णय लिए जाने के बाद अब इमरजेंसी सेवाओं को ठप करने का फैसला टाल दिया गया है। इससे अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली जरूरी चिकित्सा सेवाओं के प्रभावित होने का खतरा भी फिलहाल टल गया है।
24 सितंबर से ओपीडी का बहिष्कार
पीजी मेडिकल छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर 24 सितंबर से ओपीडी का बहिष्कार शुरू किया था। छात्रों का कहना था कि बढ़ती महंगाई और काम के दबाव को देखते हुए मौजूदा स्टाइपेंड पर्याप्त नहीं है। पीजी रेजिडेंट डॉक्टर अस्पतालों में मरीजों के इलाज, इमरजेंसी ड्यूटी और अन्य चिकित्सकीय सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। छात्रों की मांग थी कि उनके स्टाइपेंड में दूसरे राज्यों के अनुरूप बढ़ोतरी की जाए। लंबे समय से मांग पर निर्णय नहीं होने के कारण आंदोलन तेज करने की रणनीति बनाई गई थी।
अक्टूबर से मिलेगा बढ़ा हुआ स्टाइपेंड
सरकार के निर्णय के मुताबिक बढ़ा हुआ स्टाइपेंड अक्टूबर महीने से लागू होने की बात कही गई है। नए प्रावधान के तहत पीजी मेडिकल छात्रों को उनकी संबंधित श्रेणी के अनुसार अधिकतम करीब 94 हजार रुपए प्रतिमाह तक स्टाइपेंड मिलेगा। इस फैसले से पीजी छात्रों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है। वहीं डेंटल पीजी छात्रों के स्टाइपेंड को भी मेडिकल पीजी के समान किए जाने से लंबे समय से चली आ रही असमानता की मांग पर भी फैसला हुआ है।
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