सलेम इंग्लिश स्कूल में ₹3 करोड़ का वित्तीय घोटाला? पूर्व प्राचार्य के खिलाफ FIR की मांग, डायोसिस ने खोला मोर्चा 

₹3 crore financial scam at Salem English School? Diocese demands FIR against former principal, Chhattisgarh Diocese Board of Education, Current Principal in-charge Mrs. Rupika Lawrence, Raipur, Chhattisgarh, Khabargali

रायपुर (खबरगली ) छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर का प्रतिष्ठित सलेम इंग्लिश स्कूल इन दिनों एक बड़े वित्तीय विवाद और कानूनी रस्साकशी के केंद्र में है। छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ़ एजुकेशन (CDBE) ने स्कूल के पूर्व प्राचार्य वी.के. सिंह के कार्यकाल के दौरान हुई भारी वित्तीय अनियमितताओं को लेकर पुलिस कमिश्नर से शिकायत कर FIR दर्ज करने की मांग की है। जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे* संस्था द्वारा गठित विभागीय जांच समिति (Departmental Enquiry Committee) की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व प्राचार्य के कार्यकाल में करीब ₹2.50 से ₹3.00 करोड़ की गड़बड़ी की आशंका जताई गई है।

रिपोर्ट में मुख्य रूप से तीन गंभीर आरोप लगाए गए हैं

 1. निधि का दुरुपयोग

विद्यालय के फंड का नियमों के विरुद्ध इस्तेमाल। रिकॉर्ड में हेरफेर: लेखा-जोखा और एकाउंट्स बुक्स में कथित तौर पर छेड़छाड़।

2. EPF की राशि रोकना

कर्मचारियों के भविष्य निधि (PF) का करीब ₹1.80 करोड़ समय पर जमा नहीं किया गया। डायोसिस प्रशासन के अनुसार, पीएफ की इस बड़ी राशि को बाद में प्रशासनिक हस्तक्षेप के जरिए चरणबद्ध तरीके से जमा कराया गया है, जिससे कर्मचारियों को राहत मिली है।

3. साजिश का आरोप

जांच से ध्यान भटकाने की कोशिश? संस्था ने एक चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि जैसे ही वित्तीय जांच की आंच तेज हुई, वर्तमान प्रभारी प्राचार्य श्रीमती रुपिका लॉरेंस के खिलाफ भ्रामक और झूठे आरोपों का प्रसार शुरू कर दिया गया। डायोसिस का मानना है कि यह सब मुख्य जांच से ध्यान भटकाने की एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है।

बिशप का बयान: "व्यक्ति नहीं, पारदर्शिता हमारा उद्देश्य"

इस पूरे मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए डायोसिस के बिशप और धर्मगुरु ने स्पष्ट किया, "हम किसी व्यक्ति विशेष को निशाना नहीं बना रहे हैं। हमारा उद्देश्य संस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। कानून अपना काम करेगा और जो भी दोषी होगा, उस पर कार्रवाई होनी चाहिए।"

शैक्षणिक गतिविधियां सामान्य

विवादों के बीच, प्रबंधन ने अभिभावकों और छात्रों को आश्वस्त किया है कि विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। शासन के 01 दिसंबर 2025 के आदेशों का पालन करते हुए बच्चों का भविष्य उनकी प्राथमिकता बनी हुई है।

आगे क्या?

अब सबकी नजरें रायपुर पुलिस की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि इस मामले में FIR दर्ज होती है, तो यह शिक्षा जगत में वित्तीय पारदर्शिता को लेकर एक नजीर पेश करेगा। फिलहाल, इस मामले में पूर्व प्राचार्य या उनके समर्थकों की ओर से कोई आधिकारिक सफाई सामने नहीं आई है।

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