रायपुर पुलिस की 135 दिनों की सुस्ती पर सवाल... पीड़ित शाहनवाज को अब न्याय की उम्मीद
रायपुर (खबरगली ) छत्तीसगढ़ की राजधानी के मौदहापारा थाना क्षेत्र में हुए 39 लाख रुपये के बहुचर्चित ठगी मामले में मुख्य आरोपी मोहम्मद इमरान नवाब को अदालत से बड़ा झटका लगा है। गिरफ्तारी से बचने के लिए लगाई गई आरोपी की अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) याचिका को IX अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (कोर्ट नंबर 86) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए खारिज (REJECT) कर दिया है।
साढ़े चार महीने की सुस्ती और पुलिस की भूमिका
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू मौदहापारा पुलिस की कार्यशैली रही। पीड़ित मोहम्मद शाहनवाज द्वारा पुख्ता सबूतों के साथ शिकायत दर्ज कराने के बावजूद, पुलिस ने FIR दर्ज करने में 135 दिनों (साढ़े चार महीने) की लंबी देरी की। चर्चा है कि पुलिस की इस ढिलाई के कारण आरोपी को साक्ष्य मिटाने और फरार होने का पर्याप्त समय मिल गया।
क्या है पूरा मामला?
शिकायत के अनुसार, आरोपी इमरान नवाब ने एक सुनियोजित साजिश के तहत मोहम्मद शाहनवाज से कुल 39 लाख रुपये की ठगी की। काफी जद्दोजहद के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 420 (धोखाधड़ी), 406 (अमानत में खयानत) और 506 (धमकाना) के तहत मामला दर्ज किया। गिरफ्तारी के डर से आरोपी ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से जमानत अर्जी दाखिल की थी (CNR No. CGRP010033452026), जिसे कोर्ट ने पहली सुनवाई में ही ठुकरा दिया।
अब पुलिस की साख दांव पर
कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद अब मास्टरमाइंड इमरान नवाब की गिरफ्तारी का रास्ता साफ हो गया है। अब देखना यह है कि 135 दिनों तक सुस्त रही मौदहापारा पुलिस कितनी तत्परता से आरोपी को सलाखों के पीछे भेजती है और पीड़ित की मेहनत की कमाई (39 लाख रुपये) बरामद करवा पाती है।
अधिकारियों का यह कहना है
मामले में FIR दर्ज करने में हुई देरी और कोर्ट द्वारा जमानत खारिज किए जाने के बाद, मौदहापारा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि "आरोपी की तलाश के लिए अलग-अलग टीमें गठित कर दी गई हैं। कानून अपना काम कर रहा है और जल्द ही आरोपी इमरान नवाब पुलिस की गिरफ्त में होगा। पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए साक्ष्यों के आधार पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।"
- Log in to post comments