छत्तीसगढ़ में 21 मार्च को 'लोकतंत्र विजय दिवस' घोषित करने की मांग, उपासने ने मुख्यमंत्री साय को लिखा पत्र

Emergency, Demand to declare 21 March as 'Democracy Victory Day' in Chhattisgarh, National Vice President of Loktantra Senani Sangh and National President of Loktantra Prahari Sachchidanand Upasne wrote a letter to Chief Minister Sai, Raipur, Chhattisgarh, Khabargali

रायपुर (खबरगली ) लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और लोकतंत्र प्रहरी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सच्चिदानंद उपासने ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर प्रदेश में 21 मार्च को 'लोकतंत्र विजय दिवस' के रूप में मनाने और हर जिले में 'विजय स्मारक' बनाने की मांग की है।

आजादी की दूसरी लड़ाई के सेनानियों को मिले सम्मान

उपासने, जो स्वयं छात्र जीवन से ही प्रखर वक्ता और वैचारिक आंदोलनों से जुड़े रहे हैं, ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि आपातकाल (Emergency) के दौरान जिन सेनानियों ने तानाशाही का विरोध किया और 21 महीनों तक जेल की यातनाएं सहीं, वे 'आजादी की दूसरी लड़ाई' के असली वाहक हैं। उन्होंने कहा कि यह पीढ़ी आने वाली नस्लों के लिए मार्गदर्शक बनेगी, इसलिए इनके संघर्ष को इतिहास में स्थायी जगह मिलनी चाहिए।

25 जून 'काला दिवस' तो 21 मार्च हो 'विजय दिवस'

पत्र में कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 जून को 'संविधान हत्या दिवस' घोषित किया है, जो उस काले अध्याय की याद दिलाता है जब लोकतंत्र को कुचला गया था। लेकिन, 21 महीने के संघर्ष के बाद 21 मार्च 1977 को जनता ने अपने वोट की ताकत से तानाशाही को उखाड़ फेंका और लोकतंत्र की बहाली की। उपासने ने तर्क दिया कि इस जीत को 'लोकतंत्र विजय दिवस' के रूप में मनाया जाना चाहिए।

छत्तीसगढ़ और आपातकाल: एक ऐतिहासिक संदर्भ

आपातकाल के दौरान तत्कालीन अविभाजित मध्य प्रदेश (वर्तमान छत्तीसगढ़) प्रतिरोध का बड़ा केंद्र था। रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग की जेलों में मीसा (MISA) के तहत सैकड़ों सत्याग्रहियों को ठूंसा गया था। छत्तीसगढ़ के कई दिग्गज नेताओं ने उस दौरान जेल की सलाखों के पीछे रहकर लोकतंत्र की अलख जगाए रखी थी। उपासने चाहते हैं कि इसी संघर्ष की गाथा को 'विजय स्तंभ' के माध्यम से जिला स्तर पर संजोया जाए।

प्रमुख मांगें

विजय स्तंभ का निर्माण: प्रदेश के प्रत्येक जिले में 'विजय स्तंभ' या 'विजय स्मारक' बनाया जाए। जयप्रकाश नारायण की प्रतिमा: इन स्मारकों पर लोकनायक जयप्रकाश नारायण की प्रतिमा स्थापित की जाए।

सेनानियों का विवरण: स्तंभों पर संबंधित जिले के लोकतंत्र सेनानियों के नाम और चित्र अंकित किए जाएं ताकि उनकी स्मृति बनी रहे।

राजकीय सम्मान: जिस तरह सरकार ने इन्हें सम्मान निधि और राजकीय सम्मान दिया है, उसी कड़ी में इन स्मारकों के माध्यम से उनके त्याग को स्थायी पहचान दी जा सके।

सच्चिदानंद उपासने का दृष्टिकोण

बीजेपी के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष और वर्तमान में लोकतंत्र प्रहरियों की आवाज बुलंद करने वाले उपासने का मानना है कि केवल सम्मान निधि पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस कालखंड के संघर्ष को सरकारी अभिलेखों और स्मारकों में दर्ज करना आवश्यक है ताकि भविष्य में कोई दोबारा लोकतंत्र की हत्या का साहस न कर सके।

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