बिलासपुर (खबरगली) प्रदेश के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। साथ ही, कोर्ट ने अमित जोगी के सरेंडर करने और जेल जाने पर भी अंतिम निर्णय तक रोक लगा दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सीबीआई, राज्य सरकार और सतीश जग्गी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अमित जोगी ने हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा उन्हें बरी किए जाने के फैसले को पलटते हुए दोषी करार दिया गया था। राहत मिलने पर जोगी ने न्यायपालिका के प्रति अपना विश्वास जताया है। बता दें कि रामावतार जग्गी पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ला के बेहद करीबी और एनसीपी के कोषाध्यक्ष थे। इस मामले में कई तत्कालीन पुलिस अधिकारी और स्थानीय नेता पहले ही सजा काट रहे हैं। अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं।
रायपुर में की गई थी जग्गी की हत्या
4 जून 2003 को रायपुर में एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस और सीबीआई ने अमित जोगी सहित 31 लोगों को आरोपी बनाया था। साल 2007 में निचली अदालत ने अमित जोगी को बरी कर दिया था, जबकि अन्य 28 आरोपियों को सजा सुनाई थी। हालांकि, हाल ही में हाईकोर्ट ने टिप्पणी की थी कि मुख्य साजिशकर्ता की जानकारी के बिना ऐसी वारदात संभव नहीं है और उन्हें दोषी ठहराया था।
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