अल्पसंख्यक आयोग में जैन–सिख एकता का ऐतिहासिक शुकराना एवं श्रद्धांजलि कार्यक्रम संपन्न
रायपुर (खबरगली) छत्तीसगढ़ राज्य अल्पसंख्यक आयोग द्वारा जैन-सिख एकता और सांप्रदायिक सौहार्द की एक अनुपम मिसाल पेश की गई। आयोग के कार्यालय में एक ऐतिहासिक 'शुकराना एवं श्रद्धांजलि' कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें गुरु पुत्रों की शहादत के समय मानवता और धर्मनिष्ठा का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत करने वाले दानवीर सेठ टोडरमल जैन के महान कार्यों को याद किया गया। उनके त्याग, सेवा भाव एवं ऐतिहासिक योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला गया तथा उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
इतिहास का वो स्वर्ण अध्याय
कार्यक्रम के दौरान सरहिंद के उस हृदयविदारक कालखंड को स्मरण किया गया, जब छोटे साहिबजादों—बाबा जोरावर सिंह जी, बाबा फतेह सिंह जी और माता गुजरी जी की शहादत हुई थी। उस समय जब अंतिम संस्कार के लिए भूमि उपलब्ध नहीं थी, तब सेठ टोडरमल जैन ने अपनी अटूट श्रद्धा का परिचय दिया। उन्होंने शहीदों के पार्थिव शरीर रखने के स्थान को सोने की मोहरों से (खड़ी मुद्रा में) ढंककर वह भूमि खरीदी थी। यह आज भी दुनिया की सबसे महंगी ज़मीन की खरीद मानी जाती है, जो केवल त्याग और आपसी सद्भाव के लिए की गई थी।
साझा विरासत और सद्भाव का संदेश : अमरजीत
छत्तीसगढ़ राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष श्री अमरजीत सिंह छाबड़ा ने जैन समाज के प्रमुखजनों की उपस्थिति में सेठ टोडरमल जी को नमन किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा: "सेठ टोडरमल जैन जी का यह त्याग किसी एक समाज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण राष्ट्र की साझा धरोहर है। यह आयोजन जैन-सिख एकता और भारतीय संस्कृति की साझा विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का एक सशक्त प्रयास है।"
जैन-सिख एकता की गूँज
इस गरिमामय कार्यक्रम में जैन समाज के प्रतिनिधियों ने आयोग की इस पहल की सराहना की। वक्ताओं ने कहा कि इतिहास के ऐसे पन्ने वर्तमान समाज में समरसता और करुणा का संचार करते हैं। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उस महान बलिदान के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करना और आने वाली पीढ़ियों को मानवीय मूल्यों के प्रति जागरूक करना रहा।
ऐतिहासिक पहल :यशवंत जैन
इस अवसर पर जैन समाज मंदिर के अध्यक्ष श्री यशवंत जैन ने कहा कि टोडरमल जैन जी के योगदान को स्मरण करते हुए सिख समाज द्वारा जैन समाज को आमंत्रित करना एक ऐतिहासिक और भावनात्मक पहल है। उन्होंने राज्य अल्पसंख्यक आयोग के इस अभिनव प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि आयोग ने जैन और सिख समाज के बीच एक नई सेतु-कड़ी जोड़ने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि दोनों ही समाज अल्पसंख्यक होते हुए भी सदैव राष्ट्र और समाज की सेवा में अग्रणी रहे हैं। गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा अपने पूरे परिवार को धर्म की रक्षा हेतु न्योछावर करना भारतीय इतिहास का वह स्वर्णिम अध्याय है, जिसने समाज को अन्याय और मुगल अत्याचार के विरुद्ध खड़ा होना सिखाया।
इनकी भी उपस्थिती रही
इस शुकराना एवं श्रद्धांजलि कार्यक्रम में जैन समाज से मोती जैन, वर्धमान जैन, विजय जैन, मनोज जैन, इंदिरा जैन, नरेश जैन, सुनीता जैन सहित तथा सिख समाज से हरकिशन बल्लू, गगन हंसपाल, रिंकू ओबेरॉय, गुरदीप टुटेजा, रतनजीत कौर सहित बड़ी संख्या में सिख समाज के प्रमुखजन, जैन समाज के सम्माननीय पदाधिकारी, धर्मगुरु, प्रबुद्धजन, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि एवं नागरिकगण उपस्थित रहे।
यह कार्यक्रम केवल एक श्रद्धांजलि सभा नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की धरती से पूरे देश को सामाजिक समरसता और भाईचारे का संदेश देने वाला एक ऐतिहासिक कदम सिद्ध हुआ।
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