17 साल बाद मिला इंसाफ: सबूतों की अनदेखी पड़ी भारी, ट्रायल कोर्ट के फैसले को रद्द किया हाईकोर्ट ने
रायपुर (खबरगली ) छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड में 17 साल बाद न्याय की घड़ी आई है। बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पूर्व विधायक अमित जोगी को दोषी करार दिया है और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई है।
अदालत की कड़ी टिप्पणी
हाईकोर्ट ने साल 2007 में ट्रायल कोर्ट द्वारा अमित जोगी को बरी किए जाने के फैसले को पूरी तरह पलट दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि पिछले फैसले में पुख्ता सबूतों को नजरअंदाज किया गया था। कोर्ट के अनुसार, यह हत्याकांड महज एक अपराध नहीं, बल्कि 2003 में होने वाली एनसीपी की रैली को रोकने के लिए तैयार की गई एक सोची-समझी 'राजनीतिक साजिश' थी।
सीबीआई की जांच और सबूत
मामले की गहराई से जांच करने वाली सीबीआई ने कॉल डिटेल्स, गोपनीय बैठकों और गवाहों के बयानों को कड़ी की तरह जोड़ा। हाईकोर्ट ने माना कि अमित जोगी इस पूरी साजिश के मुख्य सूत्रधार थे। कोर्ट ने निचली अदालत की टिप्पणियों को 'गलत आकलन' करार दिया।
आगे की राह
इस फैसले के बाद अमित जोगी की मुश्किलें बढ़ गई हैं और उन्हें जेल जाना होगा। हालांकि, बचाव पक्ष ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिस पर अभी सुनवाई होना शेष है। छत्तीसगढ़ की सियासत में इस फैसले के दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
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