रायपुर (खबरगली ) कच्छ गुर्जर क्षत्रिय (मिस्त्री) समाज को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) में शामिल किए जाने की मांग को लेकर समाज की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। समाज के प्रतिनिधियों के अनुसार इस संबंध में 26 मार्च 2026 को मुख्यमंत्री, 7 मई को राज्यपाल, 18 अप्रैल को मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, 1 जुलाई को मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, 7 जुलाई को मंत्री रामविचार नेताम और 27 अगस्त को सांसद बृजमोहन अग्रवाल को पत्र सौंपे गए। समाज के अनुसार 9 सितंबर 2026 को इस दिशा में उम्मीद की किरण दिखाई दी है।
उसी क्रम में आज शुक्रवार को टोखन साहु, उप मुख्यमंत्री अरूण साव , पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल , उच्च शिक्षा मंत्री टकराम वर्मा और स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव को भी पत्र दिया गया।
कच्छ गुर्जर क्षत्रिय समाज ने ऐतिहासिक दस्तावेजों का दिया हवाला
समाज के भूपेंद्र चावड़ा ने बताया कि कच्छ गुर्जर क्षत्रिय समाज महासभा द्वारा प्रकाशित पुस्तक की इतिहास संशोधन समिति की जानकारी के अनुसार समाज के लोगों ने शुरुआती दौर में रोजगार के लिए कृषि कार्य अपनाया था। खेती-बाड़ी के बाद समाज के कई लोग कड़िया यानी मिस्त्री का काम करने लगे। समाज का कहना है कि समय के साथ मिस्त्री परिवार देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर बसे और निर्माण तथा रेलवे से जुड़े कई बड़े कार्यों में योगदान दिया।
रेलवे और निर्माण कार्यों में योगदान का दावा
समाज की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार गुर्जर-मिस्त्री परिवारों ने रेलवे निर्माण से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों में ठेकेदारी और कारीगरी की। समाज ने ऐतिहासिक पम्बन ब्रिज तथा ग्रेट इंडियन पेनिनसुला रेलवे रूट से जुड़े निर्माण कार्यों में भी अपने समाज के लोगों की भूमिका का उल्लेख किया है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ में जयरामनगर रेलवे स्टेशन के निर्माण तथा डोंगरगढ़ से रायगढ़ तक रेलवे कार्यों में समाज के लोगों के योगदान का दावा किया गया है। समाज की ओर से यह भी कहा गया है कि हावड़ा में हुगली नदी पर बने पुल के निर्माण में उनके समाज के कारीगरों ने कार्य किया था।
'मिस्त्री' नाम से पहचान का दिया गया आधार, गुजरात और महाराष्ट्र का उदाहरण
भूपेंद्र चावड़ा के अनुसार कच्छ गुर्जर क्षत्रिय समाज के लोग कई क्षेत्रों में 'मिस्त्री' नाम से भी जाने जाते हैं। समाज का कहना है कि गुजरात के अंजार क्षेत्र में समाज के नाम के साथ 'मिस्त्री' शब्द कोष्ठक में लिखा जाता है और वहां समुदाय के लोग 'मिस्त्री' नाम से पहचाने जाते हैं। समाज ने महाराष्ट्र में 'गुर्जर कड़िया' शब्द को अन्य पिछड़ा वर्ग की सूची में शामिल किए जाने का भी हवाला दिया है। समाज के अनुसार गुजराती शब्द 'कड़िया' का हिंदी अर्थ 'मिस्त्री' होता है।
OBC में शामिल करने की मांग
कच्छ गुर्जर क्षत्रिय (मिस्त्री) समाज का कहना है कि ऐतिहासिक दस्तावेजों, पारंपरिक व्यवसाय और विभिन्न राज्यों में प्रचलित सामाजिक पहचान के आधार पर उनके समुदाय को छत्तीसगढ़ में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) में शामिल किया जाना चाहिए। समाज ने इस मांग को लेकर राज्य के विभिन्न संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों और जनप्रतिनिधियों को पत्र भेजकर अपनी बात रखी है। अब समाज को इस संबंध में शासन स्तर पर आगे की कार्रवाई और निर्णय की उम्मीद है।
समाज ने रखी दस्तावेजों के आधार पर मांग
समाज के भूपेंद्र चावड़ा ने कहा कि समुदाय की मांग ऐतिहासिक दस्तावेजों, सामाजिक पहचान और विभिन्न राज्यों में प्रचलित वर्गीकरण से जुड़े तथ्यों पर आधारित है। समाज चाहता है कि संबंधित दस्तावेजों और तथ्यों का परीक्षण कर कच्छ गुर्जर क्षत्रिय (मिस्त्री) समाज को OBC सूची में शामिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए।
समाचार पत्रों ने भी समाज की आवाज उठाई

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