रायपुर (खबरगली) रायपुर और बिलासपुर स्मार्ट सिटी मिशन की परियोजनाओं में ₹1,764 करोड़ के कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने अपने साथी अधिवक्ताओं विजय राठौड़ और राघवेंद्र सिंह के साथ राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में तत्कालीन प्रबंध निदेशक (MD)/मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO), नोडल इंजीनियरों और संबंधित संविदाकारों की भूमिका की जांच कर प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की मांग की गई है।
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि परियोजनाओं में शत-प्रतिशत खर्च दर्शाने के बावजूद थर्ड-पार्टी क्वालिटी ऑडिट (TQA) और भौतिक सत्यापन की रिपोर्ट केंद्र सरकार के आधिकारिक रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है। उन्होंने अधूरे निर्माण कार्यों और संविदाकारों पर कथित तौर पर शून्य पेनाल्टी लगाए जाने को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
EOW मुख्यालय में सौंपा आपराधिक शिकायत पत्र
अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर, विजय राठौड़ और राघवेंद्र सिंह ने रायपुर स्थित EOW मुख्यालय पहुंचकर अतिरिक्त पुलिस महानिरीक्षक के नाम शिकायत पत्र और केंद्र सरकार से सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेज सौंपे। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, उन्हें शिकायत की अधिकृत पावती भी प्राप्त हुई है। इसके अलावा, मामले से संबंधित शिकायत की प्रतियां छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव और पुलिस महानिरीक्षक को स्पीड पोस्ट के माध्यम से भेजी गई हैं। शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एजेंसी तत्काल कार्रवाई करे और जिम्मेदार अधिकारियों एवं संविदाकारों की भूमिका की जांच करे।
RTI दस्तावेजों के आधार पर ₹1,764 करोड़ के खर्च पर सवाल
अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर के अनुसार, भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) से सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त पत्र क्रमांक K-15015/1/RTI/2026-SC-I/9210416, दिनांक 14 सितंबर 2026, के आधार पर स्मार्ट सिटी परियोजनाओं के खर्च और गुणवत्ता परीक्षण को लेकर सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि रायपुर और बिलासपुर स्मार्ट सिटी परियोजनाओं में कुल ₹1,764 करोड़ की राशि का शत-प्रतिशत व्यय दर्शाया गया है, जबकि केंद्र सरकार के रिकॉर्ड में किसी भी कार्य की थर्ड-पार्टी क्वालिटी ऑडिट रिपोर्ट और भौतिक सत्यापन रिपोर्ट उपलब्ध नहीं है। उन्होंने मांग की है कि संबंधित दस्तावेजों की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि परियोजनाओं में खर्च की गई राशि के अनुरूप कार्य पूरे हुए या नहीं और भुगतान निर्धारित नियमों के अनुसार किया गया था या नहीं।
अधूरे प्रोजेक्ट और शून्य पेनाल्टी को लेकर गंभीर आरोप
मोतीबाग 24×7 वाटर सप्लाई परियोजना पर सवाल अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने रायपुर की मोतीबाग 24×7 वाटर सप्लाई परियोजना का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्य निर्धारित समयसीमा बीतने के बाद भी अधूरे हैं। शिकायत में इन परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति, निर्माण की गुणवत्ता और भुगतान प्रक्रिया की तकनीकी जांच कराने की मांग की गई है।
कुशालपुर-संतोषी नगर ड्रेनेज परियोजना भी जांच के दायरे में
शिकायतकर्ताओं ने कुशालपुर-संतोषी नगर ड्रेनेज परियोजना को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि गंभीर अनुबंध संबंधी अनियमितताओं के बावजूद संबंधित संविदाकारों पर पेनाल्टी नहीं लगाई गई। अधिवक्ता ठाकुर का कहना है कि यदि अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन हुआ है और इसके बावजूद जुर्माना नहीं लगाया गया, तो इससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचने और संविदाकारों को अनुचित लाभ मिलने की आशंका की जांच होनी चाहिए। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित विभागों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और BNS के तहत कार्रवाई की मांग
शिकायत पत्र में कथित अनियमितताओं के संबंध में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7, 13(1)(a) और 13(2) तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316, 318 और 61(2) का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ताओं ने इन कानूनी प्रावधानों के तहत मामले की जांच कर दोषी पाए जाने वाले लोकसेवकों और संविदाकारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, आरोपों की सत्यता, संबंधित व्यक्तियों की भूमिका और लागू कानूनी प्रावधानों का निर्धारण जांच एवं सक्षम प्राधिकारी की प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगा।
मूल दस्तावेज जब्त कर फॉरेंसिक और तकनीकी जांच की मांग
EOW को सौंपे गए शिकायत पत्र में जांच एजेंसी से निम्नलिखित कार्रवाई की मांग की गई है: रायपुर और बिलासपुर स्मार्ट सिटी परियोजनाओं के खर्च और भुगतान की विस्तृत जांच। सभी संबंधित मूल मेजरमेंट बुक (MB), रनिंग बिल और फाइनल बिल का परीक्षण तथा आवश्यकतानुसार जब्ती। परियोजनाओं की वास्तविक भौतिक स्थिति और निर्माण गुणवत्ता की तकनीकी जांच। थर्ड-पार्टी क्वालिटी ऑडिट और भौतिक सत्यापन से संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल। संबंधित अधिकारियों और संविदाकारों की भूमिका की जांच कर पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर FIR दर्ज करना।
कार्रवाई नहीं होने पर विशेष न्यायालय और हाईकोर्ट जाएंगे अधिवक्ता
अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर और उनके साथी अधिवक्ताओं ने कहा है कि यदि जांच एजेंसी समयबद्ध तरीके से ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं करती है, तो वे सक्षम विशेष न्यायालय और छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के समक्ष उचित विधिक कार्यवाही करेंगे। अब इस मामले में EOW की अगली कार्रवाई और संबंधित विभागों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। स्मार्ट सिटी परियोजनाओं में खर्च, निर्माण गुणवत्ता, भुगतान और संविदा की शर्तों से जुड़े सवालों पर जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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