चिकित्सा शिक्षा के गिरते स्तर पर चिंता: छत्तीसगढ़ सिविल सोसाइटी ने की NMC को भंग करने की मांग

Concern over declining standards of medical education; Chhattisgarh Civil Society demands dissolution of the NMC National Medical Commission, Dr. Kuldeep Solanki, Convener, Chhattisgarh Civil Society, Chhattisgarh, Khabargali

रायपुर (खबरगली) देश में चिकित्सा शिक्षा की गिरती गुणवत्ता और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) की कार्यप्रणाली को लेकर विवाद गहरा गया है। छत्तीसगढ़ सिविल सोसाइटी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर NMC को तत्काल भंग करने की मांग की है। सोसाइटी के संयोजक डॉ. कुलदीप सोलंकी ने NEET PG के कट-ऑफ को घटाकर 'माइनस 40' करने के निर्णय को चिकित्सा जगत के लिए एक 'काला अध्याय' बताया है। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञ (Specialist) का खिताब केवल पंजीकरण से नहीं, बल्कि कड़ी मेहनत और योग्यता से मिलना चाहिए। मौजूदा नीतियां चिकित्सा पेशे की पवित्रता को नष्ट कर रही हैं।

योग्यता के साथ खिलवाड़ का आरोप

राष्ट्रपति को भेजी गई याचिका में डॉ. सोलंकी ने कहा कि NMC का गठन चिकित्सा शिक्षा के मानकों को ऊपर उठाने के लिए किया गया था, लेकिन इसके विपरीत आयोग ने 'योग्यता' (Merit) का उपहास उड़ाया है। पत्र में तर्क दिया गया है कि कट-ऑफ को शून्य से भी नीचे (-40) ले जाना न केवल पेशेवर गरिमा को ठेस पहुँचाता है, बल्कि भविष्य में कम योग्य विशेषज्ञों के माध्यम से आम नागरिकों के जीवन को खतरे में डालता है।

राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की अपील (प्रमुख बिंदु)

1. धारा 55 का उपयोग: केंद्र सरकार NMC अधिनियम, 2019 की धारा 55 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग कर आयोग को तुरंत भंग करे।

2. निजी हितों को बढ़ावा: आरोप लगाया गया है कि आयोग गुणवत्तापूर्ण डॉक्टर तैयार करने के बजाय निजी संस्थानों की सीटें भरने को प्राथमिकता दे रहा है।

3. बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की नियुक्ति: जब तक नया आयोग गठित न हो, तब तक प्रख्यात शिक्षाविदों और ईमानदार स्वास्थ्य पेशेवरों के 'बोर्ड ऑफ गवर्नर्स' को कमान सौंपी जाए।

4. प्रतिभा पलायन (Brain Drain): गलत नीतियों के कारण देश के प्रतिभाशाली छात्र विदेशों का रुख कर रहे हैं, जिससे देश को भारी नुकसान हो रहा है।

सिस्टम की विफलता पर उठाए सवाल

सोसाइटी ने पत्र में स्पष्ट किया है कि NMC बुनियादी ढांचे में सुधार और फैकल्टी की कमी जैसे बुनियादी मुद्दों को सुलझाने में पूरी तरह विफल रहा है। चिकित्सा जगत में इस मांग के बाद अब केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार है।

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