रायपुर (खबरगली) महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय को बड़ी सफलता मिली है। इस प्रकरण में फंसी जानी-मानी टेलीविजन स्पोर्ट्स एंकर, मॉडल और पूर्व बिग बॉस कंटेस्टेंट शेफाली बग्गा ने सट्टा ऐप के प्रचार के एवज में मिली 1.50 करोड़ रुपए की पूरी रकम ईडी के समक्ष सरेंडर कर दी है। ईडी ने इस संबंध में रायपुर स्थित विशेष न्यायालय को औपचारिक रूप से सूचित कर दिया है। जांच एजेंसी को इनपुट मिलने के बाद मई 2026 में शेफाली बग्गा के दिल्ली और मुंबई स्थित ठिकानों पर छापेमारी की गई थी।
आवास से 30 लाख रुपए नकद बरामद
इस दौरान उनके आवास से 30 लाख रुपए नकद बरामद हुए थे। इस नकदी का उचित हिसाब न दे पाने के कारण ईडी ने रकम जब्त कर ली और उन्हें पूछताछ के लिए रायपुर स्थित दफ्तर तलब किया। पूछताछ के दौरान खुलासा हुआ कि उन्हें यह राशि हाई-प्रोफाइल महादेव सट्टेबाजी ऐप का प्रचार करने के बदले भुगतान की गई थी। बता दें कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर शेफाली के 56 लाख (5.6 मिलियन) से अधिक फॉलोअर्स हैं।
गलती मानी डीडी के जरिए जमा कराए रुपए
सट्टे की अवैध कमाई का हिस्सा होने की पुष्टि के बाद शेफाली बग्गा ने बची हुई 1.20 करोड़ रुपए की राशि लौटाने की इच्छा जताई। इसके बाद उन्होंने ईडी की रायपुर यूनिट को 50 लाख रुपए और 70 लाख रुपए के दो डिमांड ड्राफ्ट सौंपे। ईडी को दिए अपने बयान में शेफाली ने स्वीकार किया कि उनसे अनजाने में इस ऐप का प्रमोशन हो गया था। उनकी भूमिका सोशल मीडिया पर सिर्फ ब्रांड प्रमोशन तक ही सीमित थी, जैसे अन्य सेलिब्रिटी काम करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सट्टा संचालन या किसी अन्य आपराधिक गतिविधि से उनका कोई संबंध नहीं था और उन्हें इस अवैध कारोबार की पहले से जानकारी नहीं थी। इस सिलसिले में ईडी ने शेफाली के अलावा उनके पिता और भाई के बयान भी दर्ज किए हैं।
दुबई से संचालित होता था देश का सबसे बड़ा सट्टा नेटवर्क
ईडी रायपुर यूनिट वर्ष 2022 से इस अंतरराज्यीय महादेव सट्टा मामले की जांच कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक, महादेव सट्टा देश का सबसे बड़ा ऑनलाइन जुआ प्लेटफॉर्म है, जो पोकर, कार्ड गेम्स और विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं पर सट्टेबाजी की सुविधा देता था। इसका संचालन छत्तीसगढ़ के भिलाई निवासी सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल द्वारा दुबई से किया जा रहा था। इस प्लेटफॉर्म ने फ्रेंचाइजी मॉडल के जरिए अपना जाल फैलाया और बेनामी बैंक खातों के एक जटिल नेटवर्क के माध्यम से बड़े पैमाने पर मनी लॉन्ड्रिंग (रकम का हेरफेर) को अंजाम दिया।
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