संवैधानिक संस्थाओं को बंधक बनाने की साजिश कर रहा इंडी गठबंधन : उज्ज्वल दीपक

Ujjwal Deepak, INDIA Alliance, BJP, Gyanesh Kumar, Chief Election Commissioner, SIR, Election Commission, Chhattisgarh News, Raipur News, Khabargali

ज्ञानेश कुमार और SIR के मुद्दे पर विपक्ष पर बरसे भाजपा प्रवक्ता उज्ज्वल दीपक

रायपुर (खबरगली ) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश प्रवक्ता उज्ज्वल दीपक ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को निरस्त करने की मांग को लेकर दिल्ली में कांग्रेस और इंडी गठबंधन के आंदोलन की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शन की आड़ में अराजकता, गुंडागर्दी और असंवैधानिक हथकंडे अपनाए जा रहे हैं, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए निंदनीय हैं।

चुनाव आयोग पर दबाव बनाना लोकतंत्र पर प्रहार : उज्ज्वल दीपक

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता उज्ज्वल दीपक ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति जताने और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार सभी राजनीतिक दलों को है। हालांकि, विरोध के नाम पर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, प्रशासनिक कामकाज में बाधा डालना और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र और स्वायत्त संवैधानिक संस्था है। ऐसी संस्था पर दबाव बनाने का प्रयास देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने वाला है। दीपक के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग और इसके लिए किए जाने वाले विरोध प्रदर्शनों में लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन किया जाना चाहिए।

राजनीतिक हताशा में अराजकता का सहारा लेने का आरोप

उज्ज्वल दीपक ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि जनता से बार-बार समर्थन नहीं मिलने के कारण विपक्षी दल अपनी राजनीतिक जमीन खो रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनहित के मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा करने के बजाय विपक्ष राजनीतिक हथकंडों का सहारा ले रहा है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान राजधानी में सामान्य जनजीवन प्रभावित करना, पुलिस और प्रशासन के साथ अभद्र व्यवहार करना तथा अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करना स्वस्थ लोकतांत्रिक राजनीति के अनुरूप नहीं है।

भाजपा ने संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता की रक्षा की प्रतिबद्धता दोहराई

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी संविधान, कानून के शासन और देश की सभी संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता एवं स्वायत्तता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक विरोध का अपना महत्व है, लेकिन विरोध की अभिव्यक्ति संवैधानिक मर्यादाओं और कानून के दायरे में रहकर ही होनी चाहिए।

Other News