रायपुर (खबरगली) छत्तीसगढ़ में बीयर पीने के शौकीनों के लिए अच्छी खबर है। राज्य सरकार ने प्रदेश में माइक्रो ब्रुअरी स्थापित करने की अनुमति दे दी है। इसके साथ ही आबकारी विभाग अब इच्छुक निवेशकों और होटल संचालकों को लाइसेंस जारी कर सकेगा। इस फैसले के बाद छत्तीसगढ़ में पहली बार स्थानीय स्तर पर तैयार की जाने वाली क्राफ्ट बीयर का उत्पादन और बिक्री शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है।
सरकार का मानना है कि माइक्रो ब्रुअरी की अनुमति मिलने से प्रदेश के होटल, रेस्टोरेंट और पर्यटन उद्योग को नई गति मिलेगी। बड़े शहरों में आने वाले पर्यटकों और युवाओं के बीच क्राफ्ट बीयर की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यह फैसला आतिथ्य उद्योग के लिए भी लाभकारी साबित हो सकता है।
नई नीति लागू होने के बाद प्रदेश में निजी निवेश बढ़ने की संभावना है। माइक्रो ब्रुअरी की स्थापना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। होटल, रेस्टोरेंट और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर से जुड़े व्यवसायों को भी इसका फायदा मिलने की उम्मीद है।
आबकारी विभाग जारी करेगा लाइसेंस
राज्य सरकार की मंजूरी के बाद आबकारी विभाग माइक्रो ब्रुअरी के लिए लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया शुरू करेगा। लाइसेंस जारी होने के बाद निर्धारित नियमों और मानकों के तहत होटल या अन्य पात्र संस्थान अपने परिसर में माइक्रो ब्रुअरी स्थापित कर सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि माइक्रो ब्रुअरी शुरू होने से राज्य सरकार के आबकारी राजस्व में भी वृद्धि होगी। साथ ही स्थानीय स्तर पर प्रीमियम पेय पदार्थों का उत्पादन बढ़ने से उपभोक्ताओं को नए विकल्प मिलेंगे और बाहर के राज्यों पर निर्भरता भी कम होगी।
सालाना 10 लाख रुपये लाइसेंस फीस
नई नीति के अनुसार माइको बुअरी संचालकों को प्रति वर्ष 10 लाख रुपये लाइसेंस शुल्क जमा करना होगा। इसके माध्यम से आबकारी विभाग को राजस्व मिलेगा। माइक्रो ब्रुअरी को रोजाना एक हजार लीटर उत्पादन की अनुमति होगी। माइक्रो बुअरी के एक उत्पादित क्राफ्ट बीयर पर 60 प्रति बल्क लीटर उत्पाद शुल्क देय होगा, जबकि इसके एक गिलास की अनुमानित कीमत ढाई से तीन सौ रुपए तक हो सकती है।
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