दुर्ग (खबरगली ) छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू की अध्यक्षता में गुरुवार को दुर्ग कलेक्टर सभा गृह में महिला उत्पीड़न से जुड़े मामलों की जनसुनवाई हुई। आयोग की प्रदेश स्तर पर यह तीसरी और दुर्ग जिले में पहली जनसुनवाई थी। सुनवाई के दौरान घरेलू विवाद, भरण-पोषण, दहेज प्रताड़ना, अवैध संबंध, जमीन विवाद और वैवाहिक विवाद से जुड़े मामलों पर आयोग ने दोनों पक्षों को सुनकर आवश्यक निर्देश दिए। जनसुनवाई में कुल 27 प्रकरण रखे गए। इनमें से 10 प्रकरणों की सुनवाई पूरी हो चुकी है, जबकि 3 मामलों को नस्तीबद्ध किया गया। शेष मामलों में आगामी तारीखों पर सुनवाई जारी रहेगी।
महिला आयोग की सुनवाई में दहेज प्रताड़ना पर सख्ती
महिला थाना प्रभारी को FIR दर्ज करने के निर्देश सुनवाई के दौरान एक मामले में दोनों पक्षों की मौजूदगी में आवेदिका के बयान और परिस्थितियों को सुनने के बाद मामला प्रथम दृष्टया दहेज प्रताड़ना से जुड़ा पाया गया। आयोग ने महिला थाना प्रभारी को दहेज प्रताड़ना का FIR दर्ज करने के निर्देश दिए। मामले को आगे की सुनवाई के लिए नियत किया गया है। यह कार्रवाई जनसुनवाई के दौरान महिला आयोग के सख्त रुख को दर्शाती है कि गंभीर आरोपों वाले मामलों में पीड़ित महिला को आवश्यक कानूनी कार्रवाई और सहायता उपलब्ध कराई जाए।
भरण-पोषण की मांग पर महिला को कानूनी सहायता
एक अन्य मामले में पति-पत्नी दोनों आयोग के सामने उपस्थित हुए। आवेदिका ने भरण-पोषण की मांग रखी, जबकि अनावेदक ने बच्चे से मिलने की इच्छा जताई। आयोग ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अनावेदक को महीने में एक बार बच्चे से मिलने की अनुमति देने की बात कही। आयोग ने आवेदिका को बताया कि वह भरण-पोषण के लिए न्यायालय में प्रकरण दायर कर सकती है। इसके लिए उसे विधिक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। वैवाहिक विवाद में दूसरी महिला से संबंध खत्म करने की समझाइश एक मामले में आवेदिका ने अपने पति पर दूसरी महिला से अवैध संबंध होने का आरोप लगाया। आवेदिका ने कहा कि यदि पति अपना व्यवहार सुधारता है तो वह उसके साथ रहने को तैयार है। आयोग ने अनावेदक को समझाइश देते हुए वैवाहिक संबंधों को बेहतर बनाने और दूसरी महिला से संबंध समाप्त करने की सलाह दी। मामले को आगामी सुनवाई के लिए रखा गया।
पति-पत्नी के रिश्ते में सुधार के बाद मामला
नस्तीबद्ध एक अन्य प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि उसका पति करीब तीन महीने तक एक महिला के साथ नासिक में रहा था। हालांकि वर्तमान में वह अपने पति के साथ रह रही है और अब मामले को आगे नहीं चलाना चाहती। आयोग ने अनावेदक को पत्नी के साथ मधुर संबंध बनाए रखने तथा किसी अन्य महिला से संबंध नहीं रखने की हिदायत दी। आवेदिका की इच्छा के आधार पर प्रकरण को नस्तीबद्ध कर दिया गया।
अदालत में मामला चल रहा था, आयोग ने किया नस्तीबद्ध
एक मामले में दोनों पक्षों ने बताया कि भारतीय दंड संहिता की धारा 376 से संबंधित मामला पहले से न्यायालय में विचाराधीन है और गवाही की प्रक्रिया लंबित है। चूंकि मामला न्यायालय में चल रहा है, इसलिए आयोग में प्रस्तुत प्रकरण को नस्तीबद्ध कर दिया गया।
जमीन विवाद में SDM कोर्ट जाने की सलाह
एक अन्य मामले में जमीन के पट्टे को लेकर विवाद सामने आया। आयोग ने इसे अनुविभागीय अधिकारी (SDM) के न्यायालय से संबंधित मामला बताया। आवेदिका को उचित न्यायिक मंच पर जाने की सलाह दी गई। साथ ही आयोग ने मामले में निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए और आदेश-पत्र की प्रति भी आवेदिका को निःशुल्क प्रदान की।
घरेलू विवादों में सखी सेंटर और पुलिस की मदद
एक मामले को दुर्ग सखी सेंटर भेजा गया और आवेदिका को गुजारा भत्ता तय कराने की दिशा में कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। वहीं एक अन्य मामले में आवेदिका और अनावेदक के बीच विवाद तथा दूसरी महिला से संबंध का आरोप सामने आया। आयोग ने आवेदिका को उतई थाने में अपराध दर्ज कराने के लिए स्वतंत्र बताया और आदेश-पत्र की प्रति निःशुल्क उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
महिला आयोग ने दी कानूनी मदद और कार्रवाई का भरोसा
जनसुनवाई में कुछ मामलों में आवेदिकाओं ने व्यक्तिगत परिस्थितियों के कारण अपना प्रकरण वापस लेने की इच्छा जताई। ऐसे मामलों में अनावेदकों को समझाइश देकर प्रकरण नस्तीबद्ध किए गए। वहीं गंभीर मामलों में पुलिस कार्रवाई, न्यायालय जाने और निःशुल्क विधिक सहायता जैसे विकल्पों की जानकारी दी गई।
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