उज्जैन (खबरगली ) विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में रक्षाबंधन का पर्व इस वर्ष विशेष धार्मिक परंपराओं और अनुष्ठानों के साथ मनाया जाएगा। श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर सबसे पहले भगवान महाकाल को राखी अर्पित की जाएगी। इसके बाद पुजारी परिवार की महिलाएं अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधेंगी। रक्षाबंधन के अवसर पर भगवान महाकाल को सवा लाख लड्डुओं का महाभोग भी लगाया जाएगा।
भगवान महाकाल के लिए तैयार हो रही 2 फीट की विशेष राखी
पुजारी परिवार की महिलाएं करीब एक सप्ताह से भगवान महाकाल के लिए विशेष राखी तैयार कर रही हैं। इस बार राखी का आकार करीब 2 फीट रखा गया है। बताया गया है कि पुजारी परिवार की महिलाएं पूरे सावन माह में व्रत-उपवास रखते हुए इस राखी का निर्माण करती हैं। राखी को रेशमी कपड़े और रेशमी धागों से तैयार किया जा रहा है। इसे आकर्षक बनाने के लिए आभूषण, कांच वर्क, रुद्राक्ष और मोर पंख का इस्तेमाल किया गया है। राखी में भगवान महाकाल के प्रिय माने जाने वाले त्रिनेत्र, ॐ और त्रिपुंड को भी विशेष स्थान दिया गया है।
राखी बनाते समय किया जा रहा ‘जय महाकाल’ का जाप
राखी तैयार करने के दौरान महिलाएं ‘जय महाकाल’ और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप कर रही हैं। धार्मिक परंपरा के अनुसार, भगवान महाकाल को राखी अर्पित करने के बाद ही पुजारी परिवार की महिलाएं अपने भाइयों को राखी बांधती हैं।
भस्म आरती में सबसे पहले महाकाल को बांधी जाएगी राखी
28 अगस्त को तड़के होने वाली भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल को विशेष राखी अर्पित की जाएगी। इसके लिए पुजारी परिवार की महिलाएं रात करीब 2 बजे मंदिर पहुंचेंगी। भस्म आरती में राखी अर्पित होने के बाद महिलाएं प्रसाद ग्रहण कर अपना व्रत खोलेंगी और फिर अपने भाइयों को राखी बांधेंगी। रक्षाबंधन के दिन भगवान महाकाल का पंचामृत अभिषेक और विशेष पूजन किया जाएगा। इसके बाद नवीन वस्त्र और आभूषणों से श्रृंगार कर उन्हें राखी अर्पित की जाएगी।
सुबह 7.30 बजे शासकीय पूजा-आरती में भी अर्पित होगी राखी
भस्म आरती के बाद सुबह करीब 7.30 बजे होने वाली शासकीय पूजा-आरती में भी भगवान महाकाल को राखी अर्पित की जाएगी। इसके बाद विशेष भोग और आरती का आयोजन होगा।
सवा लाख लड्डुओं का लगेगा महाभोग
रक्षाबंधन पर भगवान महाकाल को सवा लाख लड्डुओं का महाभोग लगाया जाएगा। मंदिर परिसर में पिछले चार दिनों से लड्डू तैयार किए जा रहे हैं। इस कार्य में 20 से अधिक हलवाई जुटे हुए हैं। मंदिर के ग्रीन रूम के पास बड़े स्तर पर लड्डुओं का निर्माण किया जा रहा है। पुजारी आकाश गुरु के अनुसार, लड्डू शुद्ध देसी घी, बेसन, शक्कर और ड्रायफ्रूट्स से तैयार किए जा रहे हैं। हर वर्ष की तरह इस बार भी एक भक्त की ओर से लड्डुओं का निर्माण कराया जा रहा है।
भस्म आरती के बाद श्रद्धालुओं को मिलेगा लड्डू प्रसाद
भोग अर्पित करने के बाद लड्डू प्रसाद श्रद्धालुओं में वितरित किया जाएगा। अधिक से अधिक भक्तों तक प्रसाद पहुंचाने के लिए बड़ी मात्रा में लड्डू तैयार किए जा रहे हैं। प्रसाद वितरण का सिलसिला शाम तक चलने की संभावना है।
सावन व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए खास है रक्षाबंधन
श्रावण मास में उपवास रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए श्रावणी पूर्णिमा का दिन विशेष महत्व रखता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पूरे सावन व्रत रखने वाले श्रद्धालु भगवान महाकाल को अर्पित लड्डू प्रसाद ग्रहण करने के बाद अपना व्रत खोलते हैं। इसी परंपरा के तहत मंदिर में सवा लाख लड्डुओं का महाभोग लगाया जाता है।
रक्षाबंधन से पहले महाकाल का हुआ विशेष श्रृंगार
रक्षाबंधन से एक दिन पहले गुरुवार को भी भस्म आरती में भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। तड़के मंदिर के पट खुलने के बाद पुजारी-पंडे ने गर्भगृह में स्थापित देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और दूध, दही, घी, शहद व फलों के रस से पंचामृत अभिषेक हुआ। प्रथम घंटाल के बाद भगवान को हरि ओम का जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद भगवान महाकाल के मस्तक पर रजत चंद्र, चंदन और भांग के साथ त्रिपुंड लगाया गया। भस्म अर्पण से पहले ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढंककर विधि-विधान से भस्म रमाई गई।
राजा स्वरूप में हुआ महाकाल का श्रृंगार
भस्म आरती के बाद भगवान महाकाल का राजा स्वरूप में विशेष श्रृंगार किया गया। उन्हें शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाला, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों की मालाएं धारण कराई गईं। इसके बाद फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया। भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान महाकाल के दर्शन के लिए पहुंचे। श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन कर अपनी मनोकामना व्यक्त की और मंदिर परिसर में ‘जय महाकाल’ के जयकारे लगाए।
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