रायपुर से सिर्फ 22 KM दूर छिपा है 500 साल पुराना रहस्यमयी शिव धाम! यहां मिलता है 9 पत्तियों वाला बेलपत्र और दुर्लभ शिव दर्शन

Raipur Shiv Dham Navagaon Shiv Temple 9 leaf Belpatra Places to visit near Raipur Ancient Shiv Temple Chhattisgarh Kalchuri period Shiv Temple Sawan Shiv Temple Arang Shiv Dham Dau Agarwal family of Arang Khabargali

सावन में आस्था का सबसे बड़ा आकर्षण बना नवागांव का प्राचीन शिव धाम, जहां इतिहास और रहस्य का अनोखा संगम

रायपुर/आरंग (खबरगली ) छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से महज 22 किलोमीटर दूर आरंग मार्ग पर स्थित नवागांव का प्राचीन शिव धाम इन दिनों श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। करीब 500 वर्ष पुराने इस ऐतिहासिक धाम की पहचान सिर्फ इसकी धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां मौजूद दुर्लभ प्रतिमाएं, अनोखे शिव स्वरूप और रहस्यमयी मान्यताएं इसे प्रदेश के सबसे खास शिव स्थलों में शामिल करती हैं। सावन के पवित्र महीने में यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं। मंदिर परिसर में मौजूद कई दुर्लभ धार्मिक धरोहरें पहली ही नजर में लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं।

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कलचुरी कालीन मंदिर आज भी सुनाता है 500 साल पुराना इतिहास

नवागांव स्थित यह प्राचीन शिव धाम 16वीं शताब्दी के कलचुरी कालीन ईंटों से निर्मित शिव मंदिर के अवशेषों के लिए प्रसिद्ध है। समय के साथ मंदिर का मूल स्वरूप भले ही खंडहर में बदल गया हो, लेकिन इसकी धार्मिक आस्था आज भी अटूट बनी हुई है। मंदिर का ऐतिहासिक शिवलिंग वर्तमान में समीप स्थित मां अंबिका मंदिर में सुरक्षित स्थापित है।

एक ही परिसर में भगवान शिव अपने पांचों गणों के साथ विराजमान

इस धाम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां भगवान शिव अपने पांच प्रमुख गणों—नंदी, कुबेर, कार्तिकेय, वीरभद्र और श्रीगणेश—के साथ विराजमान हैं। मंदिर में स्थापित अष्टधातु की दुर्लभ गणेश प्रतिमा, पारद शिवलिंग तथा स्फटिक के द्वादश ज्योतिर्लिंग श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र हैं।

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क्या है इस शिव धाम की सबसे बड़ी रहस्यमयी खासियत?

इस मंदिर में कई ऐसी विशेषताएं हैं जो इसे सामान्य शिव मंदिरों से अलग पहचान देती हैं। 

9 पत्तियों वाला चमत्कारिक बेलपत्र

आमतौर पर बेलपत्र में तीन या चार पत्तियां होती हैं, लेकिन इस धाम में मौजूद बेलवृक्ष पर नौ पत्तियों वाला बेलपत्र मिलता है, जिसे श्रद्धालु अत्यंत शुभ और दुर्लभ मानते हैं।

वायु पुराण में वर्णित पंचमुखी हनुमान स्वरूप मंदिर

परिसर में भगवान हनुमान अपने पांचों भाइयों के साथ विराजमान हैं। यह स्वरूप धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वायु पुराण में वर्णित माना जाता है और भक्तों के लिए विशेष आस्था का विषय है।

दुर्लभ रुद्राक्ष और हजारों स्फटिक शिवलिंग

यहां एकमुखी, पंचमुखी और अष्टमुखी रुद्राक्षों से निर्मित विशेष माला के साथ-साथ स्फटिक मणियों से निर्मित हजार शिवलिंगों का संग्रह भी श्रद्धालुओं को देखने मिलता है।

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जीवंत समाधियां और भैरव बाबा की विशेष पूजा

मंदिर परिसर में तीन संतों की जीवंत समाधियां स्थित हैं। वहीं भैरव बाबा को प्रतिदिन मदिरा का भोग लगाया जाता है। भैरव जयंती पर यहां विशेष अभिषेक, पूजा और धार्मिक आयोजन आयोजित किए जाते हैं।

10 पीढ़ियों से अग्रवाल परिवार कर रहा है इस धरोहर की सेवा

इस ऐतिहासिक शिव धाम का संरक्षण आरंग के दाऊ अग्रवाल परिवार द्वारा किया जा रहा है। परिवार पिछले 10 पीढ़ियों से मंदिर की सेवा, संरक्षण और रखरखाव की जिम्मेदारी पूरी श्रद्धा और निष्ठा के साथ निभा रहा है।

सावन में उमड़ रही भक्तों की भीड़

सावन माह के दौरान इस शिव धाम की धार्मिक महत्ता कई गुना बढ़ जाती है। रायपुर, आरंग सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं और दुर्लभ धार्मिक धरोहरों के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं।

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