रायपुर (खबरगली) केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने कक्षा 9वीं और 10वीं के लिए 'थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूला' अनिवार्य कर दिया है। नए एकेडेमिक सेशन से कक्षा 9वीं के छात्रों के लिए तीन भाषाएं (आर1, आर2, आर3) पढ़ना अनिवार्य होगा। इस नियम की मुख्य शर्त यह है कि इन तीन भाषाओं में से कम से कम दो भाषाएं मूल भारतीय (नेटिव इंडियन लैंग्वेजेस) होनी चाहिए। जो छात्र कोई विदेशी भाषा (जैसे फ्रेंच, जर्मन आदि) पढ़ना चाहते हैं, वे इसे तीसरी भाषा (आर3) के रूप में तभी चुन सकते हैं जब उनकी बाकी दोनों भाषाएं (आर1 और आर2) मूल भारतीय भाषाएं हों. इसके अलावा, छात्र चाहें तो इसे चौथी भाषा के रूप में भी पढ़ सकते हैं। यह नया नियम 1 जुलाई 2026 से शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए लागू होने जा रहा है।
-9वीं के छात्र अभी पढ़ेंगे 6वीं की किताबें
सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि स्कूल, छात्रों की पसंद के अनुसार थर्ड लैंग्वेज चुन सकते हैं। सभी स्कूलों को अपनी चुनी हुई लैंग्वेज की जानकारी 30 जून तक बोर्ड को देनी होगी। वहीं, कक्षा 9वीं के लिए तीसरी भाषा (आर3) की नई किताबें अभी तैयार नहीं हैं। इसलिए सीबीएसई ने एक अस्थायी व्यवस्था की है। कक्षा 9वीं के छात्र फिलहाल चुनी हुई तीसरी भाषा के लिए कक्षा 6वीं की आर3 किताबों (2026-27 एडिशन) से पढ़ाई करेंगे। रिसर्च के अनुसार, भाषा की बुनियादी योग्यताओं में 75 से 80 प्रतिशत तक समानता होती है, इसलिए इन किताबों को आधार बनाया गया है।
इस पढ़ाई को और मजबूत करने के लिए स्कूल स्थानीय कहानियों, कविताओं या अन्य साहित्यिक सामग्रियों की मदद लेंगे। इसके लिए सीबीएसई 15 जून 2026 तक डिटेल गाइडलाइंस जारी करेगा। सीबीएसई ने साफ किया है कि इस साल 10वीं बोर्ड परीक्षा में थर्ड लैंग्वेज का पेपर नहीं होगा। हालांकि, छात्रों के लिए इसकी पढ़ाई करना जरूरी रहेगा। स्कूलों को यह भी कहा गया है कि वे पढ़ाई के लिए स्थानीय और राज्य स्तर का साहित्य उपलब्ध कराएं। इसमें कविताएं, छोटी कहानियां और अन्य साहित्यिक सामग्री शामिल होंगी।
सीबीएसई ने माना कि कुछ स्कूलों को भारतीय मूल की भाषाओं के लिए क्वालिफाइड टीचर्स अरेंज करने में मुश्किल हो सकती है। ऐसे में स्कूलों को इंटर स्कूल रिर्सोसेस के माध्यम से हाइब्रिड टीचिंग सपोर्ट, रिटायर लैंग्वेज टीचर की नियुक्ति और क्वालिफाइड पोस्ट ग्रेजुएट टीचर्स के हायरिंग की परमिशन भी दी गई है। सीबीएसई और एनसीईआरटी कक्षा वीआई आर3 के लिए 19 भाषाओं में किताबें तैयार कर रहे हैं। इनमें असमिया, बंगाली, गुजराती, मराठी, तमिल और तेलुगु जैसी भाषाएं शामिल हैं।
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