रायपुर (खबरगली )धार्मिक मान्यताएं और आस्थाएं अलग होने के बावजूद एक-दूसरे की परंपराओं का सम्मान कैसे किया जा सकता है, इसकी खूबसूरत मिसाल डॉ. तृप्ति लुनिया और डॉ. आवेश जी सिंह ने पेश की है। दोनों ने अपने दांपत्य जीवन में एक-दूसरे की धार्मिक पहचान और पारिवारिक परंपराओं का सम्मान बनाए रखते हुए आपसी समझ और सौहार्द का संदेश दिया है। वर्तमान में जैन धर्म के पर्युषण पर्व के अवसर पर डॉ. तृप्ति लुनिया उपवास और तपस्या कर रही हैं। उनके साथ डॉ. आवेश जी सिंह ने भी उपवास प्रारंभ किया है। वहीं, डॉ. आवेश के परिवार की परंपरा के अनुरूप डॉ. तृप्ति ने गणपति स्थापना में सहभागी बनकर जीवनसाथी और उसके परिवार की आस्था के प्रति सम्मान व्यक्त किया।
अलग धर्म, लेकिन रिश्ते में सम्मान और विश्वास
डॉ. तृप्ति लुनिया जैन धर्म की अनुयायी हैं और मनोहर जीवन कल्याण वृद्ध निवास की संचालिका हैं। वहीं डॉ. आवेश जी सिंह अपने परिवार की धार्मिक परंपराओं से जुड़े हैं। दोनों की मुलाकात आश्रम में हुई थी। शुरुआती परिचय समय के साथ आपसी समझ, विश्वास और आत्मीयता में बदला। इसके बाद दोनों विवाह के बंधन में बंध गए। विवाह के बाद भी दोनों ने अपनी-अपनी धार्मिक पहचान को बनाए रखते हुए एक-दूसरे की आस्था और भावनाओं का सम्मान किया।
जीवनसाथी की तपस्या में बने सहभागी
जैन धर्म के महत्वपूर्ण पर्युषण पर्व के दौरान डॉ. तृप्ति लुनिया ने उपवास प्रारंभ किया। उनकी साधना में सहभागी बनते हुए डॉ. आवेश जी सिंह ने भी उपवास शुरू किया। दोनों का साथ मिलकर तपस्या करना इस बात का प्रतीक है कि जीवनसाथी की आस्था को समझना और उसकी साधना में सहयोग देना रिश्ते को और मजबूत बनाता है।
गणपति स्थापना के जरिए पारिवारिक परंपरा का सम्मान
इसी दौरान डॉ. आवेश जी सिंह के परिवार में चली आ रही गणपति स्थापना की परंपरा भी निभाई गई। डॉ. तृप्ति लुनिया ने इस परंपरा को स्वीकार करते हुए गणपति स्थापना में सहभागिता की। उनके लिए यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि अपने जीवनसाथी और उसके परिवार की भावनाओं एवं परंपराओं के प्रति सम्मान का भाव है।
दोनों परिवारों ने दिया पूरा सहयोग
इस पूरे प्रसंग की एक खास बात यह भी है कि दोनों परिवारों ने उनके रिश्ते, आस्था और निर्णयों को स्वीकार करते हुए सहयोग दिया। परिवारों की सकारात्मक सोच ने दोनों को अपनी-अपनी धार्मिक परंपराओं के साथ आगे बढ़ने का अवसर दिया। यह सहयोग बताता है कि परिवार यदि समझ और स्वीकार्यता के साथ रिश्तों को देखें, तो धार्मिक विविधता भी आपसी सौहार्द और प्रेम के रास्ते में बाधा नहीं बनती।
धार्मिक विविधता के बीच सौहार्द का संदेश
डॉ. तृप्ति और डॉ. आवेश का यह प्रसंग ऐसे समय में सामने आया है, जब समाज में अलग-अलग धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं के बीच आपसी सम्मान और सद्भाव की आवश्यकता लगातार महसूस की जा रही है। उनका दांपत्य संदेश देता है कि रिश्ते में आस्थाएं अलग हो सकती हैं, पूजा-पद्धतियां अलग हो सकती हैं और पारिवारिक परंपराएं भी अलग हो सकती हैं, लेकिन एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान समान रह सकता है।
प्रेम से आगे है स्वीकार और सम्मान
तृप्ति और आवेश की तपस्या और गणपति स्थापना की यह तस्वीर केवल एक दंपती की कहानी नहीं, बल्कि स्वीकार, सम्मान, विश्वास और पारिवारिक सौहार्द का संदेश देती है। दोनों ने अपने रिश्ते में किसी एक की आस्था को दूसरे पर थोपने के बजाय एक-दूसरे की धार्मिक भावनाओं को समझने और सम्मान देने का रास्ता चुना है। यही बात उनके रिश्ते को खास बनाती है और समाज के लिए भी सकारात्मक संदेश देती है।
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