धर्मांतरण पर 'साय' का प्रहार: छत्तीसगढ़ विधानसभा में पेश होगा कड़ा विधेयक, कैबिनेट ने दी हरी झंडी

'Sai's' attack on religious conversion: A tough bill will be introduced in the Chhattisgarh Assembly, the cabinet has given the green signal, 10 other important decisions were taken, Chief Minister Vishnudev Sai, Chhattisgarh, Khabargali

10 अन्य महत्वपूर्ण फैसले लिए गए

रायपुर (खबरगली ) मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में मंगलवार को विधानसभा परिसर में आयोजित कैबिनेट बैठक में एक बड़ा निर्णय लिया गया है. प्रदेश में अवैध और जबरन धर्मांतरण की गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए सरकार 'छत्तीसगढ़ धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक 2026' (संभावित नाम) लाने जा रही है. साय कैबिनेट ने इस विधेयक के ड्राफ्ट को अपनी औपचारिक मंजूरी दे दी है. इस प्रस्तावित कानून का मुख्य उद्देश्य किसी भी व्यक्ति को डरा-धमकाकर, प्रलोभन देकर, धोखाधड़ी से या गलत जानकारी साझा कर धर्म परिवर्तन कराने से रोकना है. सरकार का मानना है कि इस कानून के आने से प्रदेश की सांस्कृतिक अखंडता सुरक्षित रहेगी और जबरन हो रहे धर्म परिवर्तन के मामलों में कमी आएगी. कैबिनेट से हरी झंडी मिलने के बाद, अब इस बिल को जारी बजट सत्र के दौरान विधानसभा पटल पर रखा जाएगा. सदन से पारित होने और राज्यपाल की मुहर लगने के बाद यह कानून पूरे प्रदेश में प्रभावी हो जाएगा.

डिप्टी सीएम अरुण साव ने दी जानकारी

मीटिंग के बाद रिपोर्टर्स से बात करते हुए, डिप्टी मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ धर्म आज़ादी विधेयक, 2026 (छत्तीसगढ़ धर्म की आज़ादी बिल, 2026) के ड्राफ़्ट को मंज़ूरी दे दी है, जिसका मकसद ज़बरदस्ती, लालच, गलत असर या गलत जानकारी देकर एक धर्म से दूसरे धर्म में धर्म बदलने पर असरदार तरीके से रोक लगाना है. यह बिल विधानसभा के चल रहे बजट सेशन में पेश किए जाने की उम्मीद है.अभी राज्य में छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम (धर्म की आज़ादी का एक्ट), 1968 लागू है, जो 1 नवंबर, 2000 को बना था.

राजीनितक विरोध से जुड़े 13 केस होंगे वापस

डिप्टी सीएम अरुण साव ने बताया कि कैबिनेट ने राजनीतिक विरोध से जुड़े 13 केस वापस लेने को भी मंज़ूरी दी, यह फ़ैसला ऐसे मामलों की समीक्षा के लिए बनी मिनिस्टीरियल सब-कमेटी की सिफारिशों पर आधारित है.

ऊर्जा क्षेत्र में भी हुआ फैसला

डिप्टी सीएम अरुण साव ने बताया कि एक और फ़ैसले में, कैबिनेट ने नॉन-कन्वेंशनल एनर्जी सोर्स पर आधारित प्रोजेक्ट और प्लांट के लिए ग्रांट रेट तय करने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दी है. इस प्रस्ताव के तहत छत्तीसगढ़ स्टेट रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (CREDA) 2024-25 और 2025-26 में सोलर हाई-मास्ट प्लांट के लिए 1.5 लाख रुपये की राज्य सब्सिडी देगी.डिप्टी सीए अरुण साव ने आगे बताया कि साल 2026-27 और उसके बाद के सालों के लिए, सब्सिडी टेंडर रेट का 30 परसेंट या 1.5 लाख रुपये, जो भी कम हो, होगी. उन्होंने बताया कि 2 से 6 क्यूबिक मीटर कैपेसिटी वाले घरेलू बायोगैस प्लांट के लिए 2024-25 और 2025-26 के लिए 9,000 रुपये प्रति यूनिट की सब्सिडी का प्रस्ताव है, और 2026-27 के बाद सभी कैपेसिटी के लिए इतनी ही रकम का प्रस्ताव है.

साय कैबिनेट के अन्य फैसले

कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (अमेंडमेंट) बिल, 2026 और छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड एक्ट (अमेंडमेंट) बिल, 2026 के ड्राफ्ट को भी मंजूरी दे दी है. इस मीटिंग में छत्तीसगढ़ स्टाफ सिलेक्शन बोर्ड बिल, 2026 को भी मंजूरी दे दी गई है. जिसके तहत राज्य सरकार के अलग-अलग ऑफिस में टेक्निकल और नॉन-टेक्निकल ग्रुप C और ग्रुप D पोस्ट के लिए एग्जाम कराने और कैंडिडेट चुनने के लिए एक स्टाफ सिलेक्शन बोर्ड बनाया जाएगा. डिप्टी सीएम अरुण साव ने कहा कि कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ पब्लिक रिक्रूटमेंट एंड प्रोफेशनल एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) बिल, 2026 के ड्राफ्ट को भी मंजूरी दे दी, जिसका मकसद पब्लिक एग्जामिनेशन सिस्टम में ज़्यादा ट्रांसपेरेंसी, फेयरनेस और क्रेडिबिलिटी पक्का करना है. छत्तीसगढ़ सेस (अमेंडमेंट) बिल, 2026 के ड्राफ़्ट को कैबिनेट से मंज़ूरी दी गई है. जिससे प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन पर लगने वाला सेस खत्म हो जाएगा. यह ध्यान देने वाली बात है कि 2023 में, उस समय की कांग्रेस सरकार द्वारा शुरू की गई राजीव गांधी मितान क्लब स्कीम को फ़ाइनेंस करने के लिए प्रॉपर्टी ट्रांसफ़र पर लागू स्टाम्प ड्यूटी के अलावा 12 परसेंट का एक्स्ट्रा सेस लगाया गया था.डिप्टी सीएम अरुण साव ने कहा कि चूंकि यह स्कीम अभी चालू नहीं है, इसलिए रजिस्ट्रेशन पर लगने वाले एक्स्ट्रा सेस को हटाने का फ़ैसला किया गया है.

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