कान्हा किसली में रिसॉर्ट के नाम पर 3.15 करोड़ की ठगी: कोर्ट के आदेश पर रायपुर से दो आरोपी गिरफ्तार

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खबरगली अलर्ट :बड़े निवेश से पहले पूरी जांच-पड़ताल बेहद जरूरी

बिलासपुर (खबरगली ) छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में निवेश के नाम पर धोखाधड़ी का एक बड़ा मामला सामने आया है। मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध कान्हा किसली नेशनल पार्क में रिसॉर्ट और आइसलैंड प्रोजेक्ट बनाने का झांसा देकर एक कारोबारी से 3.15 करोड़ रुपये की ठगी की गई है। इस मामले में पुलिस ने दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

क्या है पूरा मामला?

मिनोचा कॉलोनी के निवासी व्यवसायी विकास चंदेल की मुलाकात साल 2017 में दीपेंद्र पाणी और कुसमाकर भोंसले से हुई थी। आरोपियों ने विकास को कान्हा किसली क्षेत्र में एक भव्य रिसॉर्ट प्रोजेक्ट का सपना दिखाया। झांसे में आकर पीड़ित ने जमीन और प्रोजेक्ट के एग्रीमेंट के नाम पर अलग-अलग किस्तों में कुल 3 करोड़ 15 लाख रुपये दे दिए।

पुलिस की सुस्ती और कोर्ट का दखल

लंबे समय तक न तो प्रोजेक्ट शुरू हुआ और न ही पैसे वापस मिले। जब पीड़ित ने सिविल लाइन थाने में शिकायत की, तो पुलिस ने इसे 'आपसी लेनदेन' बताकर पल्ला झाड़ लिया। हार मानकर पीड़ित ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट के कड़े रुख और एफआईआर के आदेश के बाद पुलिस हरकत में आई।

आधी रात को दबिश और गिरफ्तारी

कोर्ट के आदेश मिलते ही पुलिस ने विशेष टीम गठित कर आरोपियों की घेराबंदी की: दीपेंद्र पाणी: रायपुर के राजेंद्र नगर इलाके से गिरफ्तार। यह रायपुर में 'पाणी कंसलटेंट' नाम से एजेंसी चलाता था। कुसमाकर भोंसले: सरोरा गांव में अपनी पहचान छिपाकर किराए के मकान में रह रहा था, जिसे पुलिस ने घेराबंदी कर दबोचा।

जांच जारी

दोनों आरोपियों ने पूछताछ में अपना जुर्म कबूल कर लिया है। मंगलवार को उन्हें कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब इस बिंदु पर जांच कर रही है कि क्या इन आरोपियों ने 'पाणी कंसलटेंट' की आड़ में अन्य लोगों को भी अपना शिकार बनाया है। प्रमुख कानूनी धाराएँ और कार्रवाई अदालत के निर्देश पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) (या मामले की पुरानी प्रकृति को देखते हुए IPC) की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

सामान्यतः ऐसे मामलों में निम्नलिखित धाराएँ लगाई जाती हैं

धोखाधड़ी (Cheating): धोखाधड़ी और बेईमानी से संपत्ति हड़पने के लिए धारा 420 (IPC) या नई संहिता के अनुसार संबंधित धारा।

आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy): ठगी की योजना मिलकर बनाने के लिए धारा 120B (IPC)।

अमानत में खयानत (Criminal Breach of Trust): निवेश के नाम पर लिए गए पैसों का दुरुपयोग करने पर धारा 406 (IPC)।

धमकाना या जालसाजी: दस्तावेजों में हेरफेर पाए जाने पर जालसाजी (Forgery) की धाराएँ भी जोड़ी जाती हैं।

किसी भी प्रोजेक्ट में निवेश करने से पहले सावधान रहें

इस मामले ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि किसी भी बड़े निवेश से पहले पूरी जांच-पड़ताल बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रोजेक्ट, जमीन और संबंधित दस्तावेजों की सत्यता की पुष्टि किए बिना निवेश करना भारी नुकसान का कारण बन सकता है।

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