रायपुर (खबरगली ) वरिष्ठ कांग्रेस नेता और छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के पूर्व सदस्य एडवोकेट मनोज सिंह ठाकुर ने राज्य सरकार की 'स्टेट कैपिटल रीजन' (SCR) योजना की आड़ में पनप रहे भू-माफिया तंत्र पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर लाया गया यह प्रोजेक्ट रायपुर और आसपास के हजारों मध्यमवर्गीय परिवारों व किसानों के लिए मुसीबत बन गया है।
रजिस्ट्री और ले-आउट में देरी का खेल
श्री ठाकुर ने कहा कि SCR की सीमाओं और नियमों के निर्धारण में जानबूझकर की जा रही देरी का सीधा फायदा भू-माफिया उठा रहे हैं। छोटे प्लॉट धारकों की रजिस्ट्री और डाइवर्जन प्रक्रियाओं को जटिल बनाकर उन्हें आर्थिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।
प्रशासन और माफिया के गठजोड़ पर सवाल
एडवोकेट ठाकुर ने तीखा सवाल दागते हुए पूछा, "जब एक आम आदमी अपनी मेहनत की कमाई से खरीदे छोटे भूखंड पर घर बनाने की अनुमति मांगता है, तो नियम आड़े आ जाते हैं। लेकिन बड़े बिल्डरों और रसूखदारों की कॉलोनियों के लिए रातों-रात नियम कैसे बदल जाते हैं?"
किसानों में डर का माहौल
उन्होंने आरोप लगाया कि SCR मास्टर प्लान को स्पष्ट न कर ग्रामीण क्षेत्रों में भय फैलाया जा रहा है, ताकि डरे हुए किसान अपनी कीमती जमीनें कौड़ियों के दाम पर भू-माफियाओं को बेचने को मजबूर हो जाएं।
निशुल्क 'लीगल हेल्प डेस्क' की घोषणा
अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए श्री ठाकुर ने ऐलान किया है कि यदि SCR की आड़ में किसी गरीब या मध्यमवर्गीय परिवार की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश हुई या प्रशासन ने बेवजह रजिस्ट्री रोकी, तो वे उनके हक के लिए निशुल्क कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।
15 दिनों का अल्टीमेटम और उग्र आंदोलन की चेतावनी
मनोज सिंह ठाकुर ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि अगले 15 दिनों के भीतर SCR की विसंगतियों को दूर कर रजिस्ट्रियों और विकास कार्यों की बाधाएं नहीं हटाई गईं, तो वे प्रभावित किसानों और परिवारों के साथ मिलकर सड़क से लेकर न्यायालय तक उग्र आंदोलन करेंगे।
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