रायपुर (खबरगली ) राजधानी के न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइन में सोमवार, 11 मई को छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग द्वारा आयोजित 'एक दिवसीय जिला सम्मेलन' गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में न केवल प्रदेश की भाषाई अस्मिता पर चर्चा हुई, बल्कि छत्तीसगढ़ी साहित्य के नए आयामों को भी जनता के सामने रखा गया।
कार्यक्रम में उपस्थित विशिष्ट अतिथि श्री सुनील सोनी, विधायक रायपुर दक्षिण विधान सभा क्षेत्र, श्री अनुज शर्मा, विधायक धरसींवा, पूर्व कृषि मंत्री चंद्रशेखर साहू, तथा डॉ. रमेन्द्रनाथ मिश्र, पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग थे, एवं रायपुर संभाग के सभी जिलों से आए 250 से अधिक छत्तीसगढ़ी एवं अन्य स्थानीय बोलियों के वरिष्ट साहित्यकार उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख हैंः-श्री अरूण निगम, श्री मीर अली मीर, श्रीमती शशि दुबे, श्री महेंद्र ठाकुर, श्री किशोर तिवारी, श्रीमती संध्या रानी शुक्ला, श्रीमती सुमन शर्मा ‘‘बाजपेई’’, श्रीमती सीमा निगम, श्री पी.सी. लाल यादव, श्री विजय मिश्रा ‘‘अमित’’ रायपुर संभाग के सभी जिलों के जिला समन्वयक तथा मीडिया जगत के साथी उपस्थित रहें।
साहित्यकारों का सम्मान और पुस्तक विमोचन
कार्यक्रम की शुरुआत राजभाषा आयोग की सचिव डॉ. अभिलाषा बेहार के स्वागत भाषण और अध्यक्ष श्री प्रभात मिश्रा के अध्यक्षीय उद्बोधन से हुई। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ी भाषा की सेवा के लिए वरिष्ठ साहित्यकार श्री विजय मिश्रा ‘अमित’, श्रीमती सुमन शर्मा बाजपेयी और श्री चन्द्रहास साहू को सम्मानित किया गया।
सम्मेलन का मुख्य आकर्षण छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग द्वारा प्रकाशित 8 नवोदित एवं स्थापित साहित्यकारों की पुस्तकों का विमोचन रहा। विमोचित पुस्तकों में शामिल हैं: डॉ. पीसी लाल यादव की 'कुँवर अछरिया अउ राजा बेलसरिया', डॉ. दीनदयाल साहू की 'पीरा', श्री राजकुमार निषाद ‘राज’ की 'धरोहर जस जवारा, जस पचरा गीत', श्री पुनीत गुरूवंश की 'जिनगी एक रहस्यमय हे', श्री कमलेश शर्मा की 'बूंदा बिहतरी', श्री मुकेश कुमार की 'भरम आदि के दुनिया', श्री कामता प्रसाद देशलहरा ‘अकेला’ की 'भुईयां के सिंगार', श्री शत्रुघन सिंह राजपूत की 'आखर वंदन'।
स्व. सुशील भोले की स्मृतियों को किया गया नमन
'पुरखा के सुरता' सत्र के तहत प्रदेश के प्रखर साहित्यकार स्व. सुशील भोले के ‘‘व्यक्तित्व अउ कृतित्व’’ पर विशेष चर्चा आयोजित की गई। मुख्य वक्ता डॉ. पीसी लाल यादव ने बेहद रोचक ढंग से उनके योगदान को रेखांकित किया। पूरे कार्यक्रम का कुशल संचालन श्री विजय मिश्रा ‘अमित’ ने किया।
काव्य पाठ और पुस्तक प्रदर्शनी
सम्मेलन के अंतिम सत्र में प्रदेश भर से आए साहित्यकारों ने छत्तीसगढ़ी और स्थानीय बोलियों में अपनी कविताओं का पाठ कर समां बांध दिया। कार्यक्रम स्थल पर आयोग द्वारा प्रकाशित पुस्तकों और आमंत्रित रचनाकारों की कृतियों की एक भव्य प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसे आगंतुकों ने काफी सराहा।
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