बस्तर में 'लाल आतंक' का अंत! 25 लाख के इनामी कमांडर पापा राव ने 18 साथियों संग डाले हथियार

The End of 'Red Terror' in Bastar! Commander Papa Rao—carrying a bounty of ₹25 lakh—lays down arms along with 18 associates; a historic surrender. The mastermind behind the 2010 Tadmetla attack undergoes a change of heart, marking the demise of the Naxals' 'Dandakaranya Committee.' A cache of weapons recovered; 8 female Naxals also surrender, bringing with them lethal arms such as AK-47s and SLRs. A step towards 'Mission 2026': Home Minister Vijay Sharma asserts that Chhattisgarh has now emerged from the sh

ऐतिहासिक समर्पण: 2010 ताड़मेटला हमले के मास्टरमाइंड का हृदय परिवर्तन, नक्सलियों की 'दंडकारण्य कमेटी' का वजूद खत्म।

हथियारों का जखीरा बरामद: AK-47 और SLR जैसे घातक हथियारों के साथ 8 महिला नक्सलियों ने भी किया सरेंडर।

मिशन 2026 की ओर कदम: गृहमंत्री विजय शर्मा का दावा— "छत्तीसगढ़ अब नक्सलवाद के साये से बाहर।"

रायपुर/बस्तर (खबरगली ) छत्तीसगढ़ के इतिहास में शांति के एक नए युग का सूत्रपात हुआ है। दशकों तक बस्तर के जंगलों में खौफ का पर्याय रहे और 25 लाख रुपये के इनामी नक्सली कमांडर पापा राव ने हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। पापा राव के साथ 8 महिलाओं समेत कुल 18 हार्डकोर नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया है।

खूंखार कमेटी का हुआ खात्मा

इस सरेंडर के साथ ही नक्सलियों की सबसे घातक मानी जाने वाली 'दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी' (DKSZC) का प्रभाव लगभग शून्य हो गया है। आत्मसमर्पण के बाद पापा राव ने कहा कि वह अब संविधान में विश्वास रखते हुए लोकतांत्रिक तरीके से जनता की आवाज उठाएंगे।

हथियारों की बड़ी बरामदगी

प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री विजय शर्मा ने इस सफलता को 'ऐतिहासिक' करार दिया। उन्होंने बताया कि नक्सलियों ने 8 AK-47, SLR और इंसास जैसे अत्याधुनिक हथियार सौंपे हैं। शर्मा ने कवर्धा में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा, "तकनीकी रूप से अब राज्य में उस स्तर का कोई बड़ा नक्सली नेता सक्रिय नहीं बचा है। छत्तीसगढ़ अब लाल आतंक के साये से मुक्त हो चुका है।" 

लक्ष्य से पहले सफलता की उम्मीद

केंद्र और राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद से मुक्त करने के लिए 31 मार्च 2026 की समय-सीमा तय की थी। पापा राव जैसे बड़े कमांडर के सरेंडर के बाद अब इस लक्ष्य को समय से पहले हासिल करने की उम्मीद जग गई है। 

आंकड़ों में बड़ी गिरावट

जनवरी 2024 से अब तक: 2871 नक्सलियों ने किया सरेंडर।

वर्तमान स्थिति: सशस्त्र नक्सलियों की संख्या घटकर 50 से भी कम रह गई है।

दबाव में अन्य कमांडर: पापा राव के बाद अब हेमला बिच्चा और सोढ़ी केशा जैसे बचे हुए चेहरों पर भी मुख्यधारा में लौटने का भारी दबाव है। सरकार की पुनर्वास नीति और सुरक्षाबलों के निरंतर दबाव ने अंततः बस्तर की फिजा बदलने का काम किया है।

Tags